24 घंटे पहले असम में सीएम की शपथ लेने वाले हिमंत बिस्व सरमा ने 30 साल पहले प्रेमिका को कह दिया था,सासू मां को बोल देना मैं एक दिन मुख्यमंत्री बनूंगा
एक्सट्रा क्लास,जिम,ट्रेन,बस,मंच और दोस्त का घर,यहां भाजपा नेताओं का हुआ पहला प्रेम मिलन,फिर बंधे शादी के अटूट बंधन में
यहां सिर्फ मोदी,योगी,मनोहर लाल जैसे कुंवारें ही नहीं,प्रेम गली के पुराने पंछी भी हैं
न्यूज डेक्स इंडिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 22 साल की उम्र में प्रेमिका को यह कह दिया था जाओ सासू मां को कह देना मैं एक दिन मुख्यमंत्री बनूंगा और 30 साल बाद,यानी कुछ घंटे पहले यह बात सच सिद्ध हो हुई। मीडिया रिपोर्ट्स पर नजर डालेंगे तो सामने होगा कि भाजपा में हिमंत बिस्व सरमा जैसे और भी कई नेता हैं,जिन्होंने कालेज की एक्स्ट्रा क्लास से लेकर ट्रेन,बस,राजनीतिक मंच, संगठन, जिम,बहन और दोस्त के घरों से जनम जनम के साथी से पहली मुलाकात की और सदा के लिए प्रेम के बंधन में बंध गए।
फिल्मी किस्से कहानियां इसी तरह बनती हैं। प्रेम गली से सत्ता के गलियारों तक धमाल मचाने वालों में भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के नाम शुमार हैं। इनमें से आज कोई सीएम बना,कोई डिप्टी सीएम तो कई केंद्रीय मंत्री बन चुके हैं। वैसे भाजपा के बारे में एक भ्रांती है कि यहां अटलजी और मोदी जी सरीखे कई दिग्गज कुंवारे हैं। कहना गलत भी नहीं होगा कि पिछले तीन दशकों में भारत की राजनीति में कुंवारों का प्रभाव देखने को मिल रहा है। फिर चाहे वे अटल बिहारी बाजपेयी रहे हों,जार्ज फर्नाडिस और चाहे जय ललिता रहीं हो,या राहुल गांधी के अलावा माया और ममता,सब कुंवारे ही तो हैं।
फिलहाल कुंवारों का दौर जारी है,क्योंकि देश के प्रधानमंत्री हों या सबसे ज्यादा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ,हरियाणा में दूसरी बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और दुनिया में सबसे ज्यादा कार्यकर्ता बताने वाली पार्टी भाजपा को चारों खाने चित कर पश्चिमी बंगाल की तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी ममता बैनर्जी,ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक यह दिग्गज कुंवारे हैं।
अब अचानक इतने कुंवारों की बात भाजपा के ताजा तरीन सीएम हिमंत बिस्व सरमा के कारण हो रही है।भई नहीं, हिमंत बिस्व सरमा कुंवारे नहीं है। उनका नाम तो इसलिए लिया जा रहा है कि उन्हें 24 घंटे हुए हैं असम को सीएम पद की शपथ लिए और उनकी प्रेम कहानी और उन्होंने शादी के लिए अपनी सास को क्या संदेश भिजवाया था ? यह बात चर्चा में आ रही है। जब भाजपा या दूसरी पार्टियों के कुंवारे नेताओं पर चर्चा हो सकती है, तो क्या उन दिग्गज नेताओं पर चर्चा ना हो,जिन्होंने शादी के लिए तो कुछ भी करेगा ? या उन्होंने बहुत कुछ किया,तब उनकी शादी हुई।
भाजपा पर अक्सर हिंदुत्व,आजाद ख्यालात से परे,पुरानी परंपराओं को बढ़ावा देने वाली सोच और रूढ़िवाद में विश्वास रखने वाली पार्टी का लेबल चसपा किया जाता है।पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स को पर अगर नजर डालेंगे तो नेताओं अंतरजातीय ही नहीं,बल्कि दूसरे धर्मों में जाकर जीवन संगिनी के लिए मशक्कत करने के किस्से भी खूब मिलते हैं और इनमें बड़े दावे का किस्सा असम के भाजपाई सीएम हिमंत बिस्व सरमा का है,जिन्होंने 22 साल की उम्र में अपनी प्रेमिका के सामने यह दावा कर दिया था कि मम्मी अगर पूछ क्या करता है तो यह बता देना कि वह असम की सीएम बनने वाला है।
तब प्रेमिका से बोले थे हिमंत बिस्व सरमा
हिमंत बिस्व सरमा के उस दावे के 30 साल बाद वही हुआ,जो संदेश उन्होंने अपनी होने वाली पत्नी को होने वाली सास के सामने खड़े होकर सुनाने को कहा था। असम के नए मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी का नाम रिनिकी भुयन है। कालेज के दिनों में सरमा रिनिकी का मेलजोल शुरु हुआ था और इस दौरान उन्होंने रिनिकी के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था,मगर रिनिकी की चिंता यह थी कि मां के पूछने पर वह क्या बताएगी, लड़का क्या काम करता है,तो इसके जवाब में हिमंत ने कहा था कि मां को कह देना मैं एक दिन मुख्यमंत्री बनूंगा और तीन दशकों के बाद असम के 15 वें सीएम के रुप में शपथ लेने के बाद यह बात सच भी सिद्ध हो गई।
हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर और डा.साधना सिंह
हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर का प्रेम विवाह भाजपा से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी कार्यकर्ता डा.साधना ठाकुर से हुआ था।जयराम ठाकुर जम्मू कश्मीर में भाजपा का दायित्व संभाल रहे थे। दोनों की इसी सक्रियता के दौरान नजरें मिली,फिर दिल और सात जन्मों का साथ देने साथ वैवाहिक गठबंधन हो गया।डा.साधना सिंह मूल रुप से कर्नाटक से ताल्लुक रखती हैं।
गुजरात के सीएम विजय रुपाणी को प्रचारक रहते कार्यकर्ता के घर मिला जीवन साथी
देश के प्रधानमंत्री जिस राज्य से आते हैं गुजरात ही तो है।इस गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं विजय रुपाणी,जिनका जन्म पड़ौसी देश म्यांमार में हुआ था।इनके जन्म के कुछ वर्ष बाद रुपाणी परिवार 60 के दशक में म्यांमार से राजकोट (गुजरात) आया और उनका प्रेमविवाह हुआ अंजलिबेन साथ। विजय रूपाणी की तरह अंजलि बेन भी पहले से ही राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय थीं। वह भारतीय जनसंघ की कार्यकर्ता रह चुकी हैं और विजय रुपाणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक।आरएसएस में परंपरागत रुप से प्रचारक अधिकांश प्रवास के दौरान मुख्य कार्यकर्ता के घर ही जलपान करते हैं। अंजलि बेन के पिता भी पुराने संघ कार्यकर्ता थे और विजय रुपाणी ने प्रचारक के रुप में कई बार अंजलि बेन के घर जलपान किया था। उन्हें अंजलीबेन के आचार विचार भा गए थे। कई वर्षों पश्चात दोनों परिवारों की सहमति विवाह हुआ।
अमृता रानाडे से दोस्त के घर में हुई थी फडनवीस की मुलाकात
महाराष्ट्र के सीएम रहे देवेंद्र फडनवीस की धर्मपत्नी अमृता रानाडे का पहला मिलन उनके दोस्त के घर पर कराया गया था। उनकी पत्नी अमृता नागपुर के मशहूर प्रसूति चिकित्सक डॉ. चारु रानाडे और नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. शरद रानाडे की पुत्री हैं।दरअसल जब इनकी पहली मुलाकात हुई उस समय फडनीस विधायक बन चुके थे। बालीवुड की फिल्मों के शौकीन देवेंद्र फडनवीस फिल्म एक्ट्रेस काजोल के जबरदस्त फैन थे और उन्हें अमृता में काजोल की झलक दिखी और प्रपोज कर दिया।
मिस मेरठ रह चुकी हैं रश्मि त्यागी को दिल दे बैठे थे तीरथ सिंह रावत
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की किस्मत का ताला दो माह पहले ही खुला है।वे अब उत्तराखंड के सीएम हैं और उनकी धर्मपत्नी का नाम है डा.रश्मि त्यागी। वह भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ी रही हैं और मिस मेरठ भी रह चुकीं हैं। साल 1996 में एक कार्यक्रम के दौरान रश्मि मंच से भाषण दे रही थीं. उस समय स्टेज पर तीरथ सिंह रावत भी थे। रश्मि का यह भाषण सुनने के कुछ रोज बाद उनके घर पर रिश्ते की बात शुरु हुई,पहले पहल तो रश्मि के परिवार वाले नहीं माने,मगर 1999 में दोनों परिवारों की सहमति से तीरथ सिंह और रश्मि का विवाह हुआ।
जिम से शुरु हुई थी त्रिपुरा के सीएम बिप्लव देव की लवस्टोरी
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं,मगर सेहत के प्रति काफी जागरुक रहने वाले यह नेताजी एक जमाने में अपनी फिटनेस बनाये रखने के इरादे से रोजाना जिम में जाया करते थे। इसी जिम में उनकी पहली मुलाकात नीति देब से हुई थी और बाद में दोनों का प्यार विवाह मजबूत बंधन में बंध गया।
गोंदिया में बहन के घर गए शिवराज सिंह चौहान, वहीं देखा था साधना सिंह को
शिवराज सिंह चौहान संघ में सक्रिय होने के कारण पहले विवाह नहीं करना चाहते थे।इसलिए उन्होंने अपने छोटे भाइयों का विवाह कर दिया था,लेकिन परिवार के बढ़ते दबाव के चलते वह एक मर्तबा अपनी बहन के घर गोंदिया पहुंचे थे,यहीं उनकी मुलाकात साधना सिंह के साथ हुई और दिल दे बैठे।परिवार वालों ने रिश्ते की बात की और रिश्ता पक्का हुआ। हालांकि शादी से पहले इनकी मुलाकातें और पत्रों का सिलसिला चलता रहा। पहला पत्र था,जिसकी वजह से सब संभव हुआ। इस पत्र में शिवराज सिंह चौहान ने हाल ए दिल बयां कुछ इस तरह से किया…उन्होंने लिखा था कि राजनीतिक गतिविधियों की व्यस्तता के कारण वह उन्हें शादी के बाद पूरा समय नहीं दे सकेंगे और भी इस तरह की कई बातें उन्होंने विवाह से पहले साधना सिंह से साझा की। यह साफगोई साधना सिंह को पसंद आई और दोनों परिवारों की मौजूदगी में हिंदू रीतिरिवाज से दोनों का विवाह हुआ।
ईसाई युवती से बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी का विवाह,अटलजी ने दिया था आशीर्वाद
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की विवाह से पहले जेसी जॉर्ज से पहली मुलाकात चलती ट्रेन में हुई थी। ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने वाले जेसी जॉर्ज और मारवाडी घराने से संबंधित सुशील मोदी के बीच विवाह को लेकर परिवार तक बात पहुंची तो लग रहा था सब सामान्य नहीं है,मगर दोनों परिवार राजी हुई और इनके विवाह कार्यक्रम में अटल बिहारी बाजपेयी भी शामिल हुए थे। यहां भी अटल जी ने अनूठा संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि अभी तक यह दोनों संघर्ष करते रहे, लेकिन इस विवाह को परिवारों ने माना, इसमें शामिल हैं, आनंदित हैं, आज इतने बड़े समारोह में हम सब आनंदपूर्वक भाग लेने के लिए इकट्ठा हुए, यह अपने में एक बड़ी बात है।
अटलजी ने इस मौके पर कहा था कि समाज कुरीतियों में जकड़ा हुआ है, प्रेमियों के बीच भी दीवारें खड़ी कर दी जाती है।जो उन दीवारों को तोड़कर विवाह करते हैं, उन्हें परिवारों की मान्यता नहीं मिलती, समाज का आशीर्वाद नहीं मिलता है, लेकिन इस विवाह को समाज का पूरा आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है। इस दृष्टि से यह विवाह आगे के लिए पथ-प्रदर्शक बनेगा, यह मैं कामना करता हूं। भाजपा के नेताओं के यह प्रेम विवाह इस बात साक्षी है कि सुशील मोदी के विवाह समारोह के दौरान अटल जी ने 1986 में जो कामना की थी,वह फलीभूत हो रही है।
भाजपा नेता नकली की मुलाकात कालेज एक्सट्रा क्लास में तो शहनवाज को डीसीसी बस में मिला प्यार
वैसे उससे पहले भी और उसके बाद भी,क्योंकि भाजपा कद्दावर नेता मुख्तार अब्बास नकवी 3 जून 1983 में हिंदू धर्म की युवती के साथ प्रेम विवाह कर चुके थे,उनका प्यार कालेज की एक्सट्रा क्लास में परवान चढ़ा था। वहीं भाजपा के एक कद्दावर मंत्री शहनवाज हुसैन का गैर मुस्लिम युवती रेनु के साथ डीटीसी की बस में पहला मिलन 1985 में हुआ और इसके बाद 9 वर्षों तक मुलाकातों के बाद दोनों ने विवाह कर लिया। कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी धर्मपत्नी प्रियदर्शनी सिंधिया की पहली मुलाकात 1991 में एक दोस्त की पार्टी में ही हुई थी। यहां से शुरु हुआ मुलाकातों को सिलसिला तीन वर्षों तक चला और 12 दिसंबर 1994 में इनका विवाह हुआ।