Home haryana कंकण सूर्यग्रहण का विशेष महत्त्व वही है जहां वह दिखाई देगा : डॉ. सुरेश मिश्रा

कंकण सूर्यग्रहण का विशेष महत्त्व वही है जहां वह दिखाई देगा : डॉ. सुरेश मिश्रा

by ND HINDUSTAN
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न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। कॉस्मिक एस्ट्रो के  डायरेक्टर व श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र) के अध्यक्ष  डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2021 का दूसरा ग्रहण 10 जून गुरुवार को  शनि जयंती के साथ लगने जा रहा है जो एक सूर्य ग्रहण होगा। धार्मिक दृष्टि से भले ही ग्रहण लगना शुभ नहीं माना जाता है, वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा सूर्य को इस तरह से ढकेगा जिससे सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशमान रह जाएगा और मध्य हिस्सा पूरी तरह से ढक जाएगा। इस स्थिति में सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह नजर आयेगा। इस अद्भुत सूर्य ग्रहण से विशेष बातें है: 

कब और कहां लगेगा सूर्य ग्रहण ? सूर्य ग्रहण 10 जून को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा जिसकी समाप्ति शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगी। ये ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, लेकिन उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में, उत्तरी कनाडा, यूरोप और एशिया में, ग्रीनलैंड और रुस के अधिकांश हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। कनाडा, ग्रीनलैंड तथा रूस में वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। वहीं उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्सों, यूरोप और उत्तर एशिया में आंशिक सूर्य ग्रहण दृश्य होगा। भारत में ये ग्रहण दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। लेकिन ग्रहण का असर सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। सिंह और धनु वालों के लिए सूर्य ग्रहण बेहद ही शुभ है। धन लाभ होने के आसार रहेंगे। वहीं मेष, वृषभ, कन्या और तुला वालों के लिए सूर्य ग्रहण कष्टदायी साबित हो सकता है। इसलिए सतर्क रहें।

सूर्य ग्रहण के समय  क्या सावधानियां रखें ?

-सूर्य ग्रहण को खुली आंखों से देखना हानिकारक माना जाता है। ग्रहण के दौरान आपको अपनी आंखों पर ग्रहण के दौरान प्रयोग किये जाने वाले चश्में लगाने चाहिए।
-इस दौरान तेज धारदार वाली वस्तु चाकू, छुरी इत्यादि का प्रयोग न करें।
-ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
-इस समय पूजा भी नहीं की जाती है।
-ग्रहण के दौरान आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
-ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिये महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

विशेष सूतक काल :

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूतक काल की गणना सूर्य ग्रहण लगने 12 घंटे पहले से की जाती है तथा सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। यहां तक कि मंदिरों के द्वार भी बन्द कर दिये जाते हैं। भोजन आदि भी इस काल में करना या बनाना उचित नहीं माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार सूतक काल में केवल भगवान का जप, भजन ,सुमिरन और ध्यान करने का ही विधान है।

सूर्य ग्रहण के बाद दान का महत्व है : 

सूर्य ग्रहण काल में राहु व केतु ग्रहों के अधिक सक्रिय होने के कारण आपके जीवन में कई तरह की कठिनाइयां व परेशानियां आ सकती हैं। अतः राहु-केतु के दुष्रभाव को समाप्त करने के लिए ग्रहण के बाद अनाज, धन या गाय का दान सुपात्र को करना चाहिए। ग्रहण के बाद किये हुये दान का फल अक्षय होता है तथा सभी रोग-दोष से मुक्ति मिलती है।

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