न्यूज डेक्स इंडिया
चंडीगढ़। कोरोना संक्रमित भारत के महान धावक मिल्खा सिंह का चंडीगढ़ पीजीआई में निधन हो गया। मिल्खा सिंह 19 मई को कोविड संक्रमित पाए गए थे। इसके बाद उनकी हालत में सुधार नहीं होने के कारण उन्हें 24 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आक्सिजन लेवल लगातार गिरने की वजह से उन्हें पूर्व कामनवेल्थ गेम्स के चेंपियन मिल्खा सिंह को गुरुवार चंडीगढ़ पीजीआई के आईसीयू वार्ड में दाखिल कराया गया था। उनकी धर्मपत्नी निर्मल कौर आक्सीजन की बढ़ती जरूरत के चलते पांच दिन पहले निधन हो गया था।
20 नवंबर 1929 विभाजन से पहले के भारत के गोविनपुरा (वर्तमान में पाकिस्तान) में जन्मे मिल्खा सिंह का शुरुआती जीवन बेहद मुश्किलों भरा रहा। कड़े संघर्ष के बाद उन्होंने ये मुकाम हासिल किया था। भारत के विभाजन में मिल्खा सिंह ने अपने माता पिता को खो दिया था और विभाजन के बाद पाकिस्तान से वे शरणार्थी बनकर ट्रेन में भारत आए थे।
भारत में आकर उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया और उनके जीवन पर आधारित कई वृत्त चित्र,सीरियल और बालीवुड सिनेमा की सफल फिल्म बनाई गई,क्योंकि एक होनहार धावक के तौर पर उन्होंने 200 मी और 400 मी की दौड़ में कई उपलब्धियां हासिल की और भारत श्रेष्ठतम तम धावक बने।
कार्डिफ़, वेल्स, संयुक्त साम्राज्य में 1958 के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद सिख होने की वजह से लंबे बालों के साथ पदक स्वीकार ने पर पूरा खेल विश्व उन्हें जानने लगा।
फ्लाईंग सिख के उपनाम से चर्चित मिलखा सिंह देश में होने वाले विविध तरह के खेल आयोजनों में शिरकत करते दिखे। हैदराबाद में 30 नवंबर,2014 को हुए 10 किलोमीटर के जियो मैराथन-2014 को उन्होंने झंड़ा दिखाकर रवाना किया था। पदमश्री मिल्खा सिंह पंजाब के खेल निदेशक भी रहे।
विशेष उपलब्धियां
मिल्खा सिंह ने बतौर धावक 1958 के एशियाई खेलों में 200मी व 400 मी में स्वर्ण पदक जीते।
इन्होंने 1962 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
इन्होंने 1958 के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता।