Home Kurukshetra News राजस्व रिकार्ड में मिले अरुणा, वरुणा और सरस्वती के संगम होने के साक्ष्य

राजस्व रिकार्ड में मिले अरुणा, वरुणा और सरस्वती के संगम होने के साक्ष्य

by ND HINDUSTAN
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सरस्वती चैनल पर मिले प्राचीन घाट मुगलकालीन शासन के सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड पिहोवा के इस स्थल को दर्शनीय और सुंदर स्थल के रुप में करेगा विकसित

सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की टीम ने किया पिहोवा की साईट का निरीक्षण

न्यूज डेक्स संवाददाता

पिहोवा। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने कहा कि पिहोवा के राजस्व रिकार्ड में सरस्वती चैनल के निकट संगमेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही प्राचीन घाट के होने के साथ-साथ अरुणा, वरुणा व सरस्वती नदी के संगम होने के साक्ष्य मिले है। इस सरस्वती चैनल के निकट मिले प्राचीन घाट मुगलकालीन शासन के बताए जा रहे है। इसलिए यह स्थल कुरुक्षेत्र ही नहीं हरियाणा के लिए एक प्राचीन धरोहर है। इस धरोहर को सहेजकर रखना हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की जिम्मेवारी है।

बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच मंगलवार को पिहोवा सरस्वती चैनल की साईट का निरीक्षण करने के उपरांत अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच, वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर एआर चौधरी, हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की शोध अधिकारी डा. दीपा, कानूनगो गीताराम, नरेन्द्र, संजय कुमार व पटवारी संजय ने गांव अरुणाय में सरस्वती चैनल के पास प्राचीन घाट की साईट का निरीक्षण किया।

इस निरीक्षण के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों से मौके पर ही प्राचीन राजस्व रिकार्ड का अवलोकन कर साईट के रिकार्ड को भी देखा। इस राजस्व रिकार्ड में प्राचीन घाट, तीर्थ और अरुणा, वरुणा व सरस्वती नदी के संगम होने के साक्ष्य मिले है। अगर वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर एआर चौधरी के पक्ष को माने तो इस स्थल पर मिले प्राचीन घाट मुगल काल के है और जिनके अवशेष आज भी मौके पर है।

उपाध्यक्ष ने कहा कि राजस्व रिकार्ड 1905 के बंदोबस्त में अरुणाय के पास इस स्थल पर अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी का जिक्र किया गया है। इन तीनों नदियों के मार्गों पर आज अतिक्रमण किया जा चुका है। इतना ही नहीं वेदों, पुराणों और इतिहास के जानकारों की माने तो गांव अरुणाय में भगवान शिव खुद अवतिरत हुए थे और आज उस स्थल पर संगमेश्वर महादेव मंदिर है, जो पूरे विश्व में प्रसिद्घ है। इसलिए इस स्थल को कुरुक्षेत्र ही नहीं हरियाणा की एक प्राचीन धरोहर के रुप में देखा जा रहा है।

इस स्थल को सहेजना हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड का प्रथम कर्तव्य बनता है। इस स्थल को बोर्ड की तरफ से विकसित किया जाएगा। इसके लिए बोर्ड की तरफ से शीघ्र ही योजना तैयार की जाएगी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष योजना को रखा जाएगा। इस योजना पर मोहर लगते ही बोर्ड की तरफ से कार्य शुरु कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पिहोवा के गांव अरुणाय के पास यह घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और अरुणाय में संगमेश्वर महादेव मंदिर में रोजाना श्रद्घालुओं का आना-जाना लगा रहता है। इसलिए यह स्थल पर्यटकों और श्रद्घालुओं के लिए एक आकर्षण का केन्द्र बन सकता है। इस विषय को जहन में रखते हुए ही प्राचीन घाटों का निर्माण किया जाएगा और इस स्थल को एक तीर्थ के रुप में विकसित करने का काम किया जाएगा। जब यह घाट तीर्थ के रुप में विकसित होंगे तो निश्चित ही इस घाट पर पर्यटक रुकेंगे और लोगों को हरियाणा की इस धरोहर से आत्मसात होने का अवसर भी मिलेगा।

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