श्री गणेश उत्सव पर श्री जयराम विद्यापीठ में गणपति श्री गणेश की लीलाओं का हुआ गुणगान
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र, 25 अगस्त। ब्रह्मसरोवर के तट पर श्री जयराम विद्यापीठ में जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी के सान्निध्य में श्री गणेश चालीसा का पाठ किया गया तथा श्री गणेश की भव्य प्रतिमा के समक्ष पूजन किया गया। इसके उपरांत ब्रह्मचारी के साथ विद्यापीठ के ट्रस्टियों ने श्री गणेश जी की आरती की।
ब्रह्मचारी ने इस मौके पर गणपति भगवान श्री गणेश की लीलाओं का गुणगान करते हुए बताया कि श्री गणेश चालीसा में वर्णित है कि माता पार्वती ने पुत्र श्री गणेश प्राप्ति के लिए कठोर तप किया। इस तप से प्रसन्न होकर स्वयं श्री गणेश ब्राह्मण का रूप धर कर पहुंचे और उन्हें यह वरदान दिया कि मां आपको बिना गर्भ धारण किए ही दिव्य और बुद्धिमान पुत्र की प्राप्ति होगी। ऐसा कह कर वे अंतर्ध्यान हो गए और पालने में बालक के रूप में आ गए।
ब्रह्मचारी ने बताया कि श्री गणेश के जन्म के अवसर पर चारों लोकों में हर्ष छा गया। इस मौके पर भगवान शिव और माता पार्वती ने विशाल उत्सव रखा। हर तरफ से देवी, देवता, सुर, गंधर्व और ऋषि, मुनि श्री गणेश को देखने आने लगे। ब्रह्मचारी ने श्री गणेश जन्म प्रसंग की चर्चा में बताया कि शनिदेव महाराज भी देखने आए। माता पार्वती ने उनसे बालक को चलकर देखने और आशीष का आग्रह किया। शनि महाराज अपनी दृष्टि की वजह से बच्चे को देखने से बच रहे थे। माता पार्वती को बुरा लगा।
उन्होंने शनिदेव को उलाहना दिया कि आपको यह उत्सव नहीं भाया, बालक का आगमन भी पसंद नहीं आया। शनि देव सकुचा कर बालक को देखने पहुंचे, लेकिन जैसे ही शनि की किंचित सी दृष्टि बालक पर पड़ी, बालक का सिर आकाश में उड़ गया। उत्सव का माहौल मातम में परिवर्तित हो गया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती विकल हो गई। चारों तरफ हाहाकार मच गया। तुंरत गरूड़ जी को चारों दिशा से उत्तम सिर लाने को कहा गया। गरूड़ जी हाथी का सिर लेकर आए।
यह सिर भगवान शंकर जी ने बालक के शरीर से जोड़कर प्राण डाले। इस तरह गणेश जी का सिर हाथी का हुआ। इस अवसर पर श्री गणेश पूजन में के के गर्ग, राजेंद्र सिंघल, टेक सिंह लौहार माजरा, के के कौशिक, कुलवंत सैनी, पवन गर्ग, श्रवण गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, एस एन गुप्ता, राजेश सिंगला, प्रवेश राणा, यशपाल राणा, अनिल भंडारी, मनोज कुमार, अशोक गर्ग, सतबीर कौशिक, रोहित कौशिक, आचार्य प. राजेश प्रसाद लेखवार शास्त्री इत्यादि भी मौजूद थे।