न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम का आरंभ भगवान धनवंतरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्जवलित कर किया गया। मंच का संचालन डॉ. रजनीकांत, शोध विभाग ने किया। अध्यक्षता डॉ. अनिल शर्मा, कुलसचिव और मुख्य वक्ता के रुप में डॉ. बलबीर संधू, कुलाना-शासक उपस्थित रहे। आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार धीमान ने ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को आशिर्वचन और विश्वविद्यालय स्टाफ को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी।
कुलपति डॉ. बलदेव कुमार धीमान ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा अपने देश में अनादि काल से चली आ रही है। मनुष्य, समाज, प्रकृति और ईश्वरीय शक्ति के बीच के संबंध को गुरु के चरणों में बैठकर ही समझा जा सकता है। गुरु शिष्य के सभी विकारों को दूर कर, असुरत्व की ओर जाने से रोकता है। वर्तमान में हम देख भी रहे हैं गुरु-शिष्य परंपरा का लोप होने से समाज में असंतुलन पैदा हुआ है। गुरु ही है जो मनुष्य को सम्यक मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। डॉ. बलबीर संधु ने भगवान धनवंतरी की प्रतिमा पर माल्यार्पण की और पुष्प चढ़ाये। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने शिक्षकों का आशीर्वाद प्राप्त किया। विकास शर्मा, सहायक कुलसचिव ने कार्यक्रम की भूमिका में कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को यह उत्सव पूरे देश में मनाया जाता है। गुरु सूर्य के समान है। जो पूरे विश्व को प्रकाश देता है।
मुख्य वक्ता डॉ. बलबीर संधु, कुलानाशासक ने गुरु के महत्व को विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय स्टॉफ को बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में सब त्यौहार को धूमधाम से मनाया जाता है। जो यहां के गुरुओं की देन है। शिक्षा, खेलकूद और व्यवसाय सब में अलग-अलग प्रकार के गुरु हो सकते है। शिष्य में गुरु के लिए अगाध श्रद्धा होनी जरूरी है। तब वह हर क्षेत्र में विजय प्राप्त कर सकता है। वहीं गुरु का भी चरित्रवान होना आवश्यक है।
आज चारों ओर चरित्रवान व्यक्तियों की कमी है। इसी का खामियाजा समाज को भुगतना पड़ा है। एक सच्ची गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से समाज में फैली विकृति को रोका जा सकता है। कार्यक्रम के अन्त में प्रध्यापकों, गैर शिक्षण स्टॉफ और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए डॉ. अनिल शर्मा कुलसचिव ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का अपने देश में बड़ा महत्व है। माता-पिता बच्चे के प्रथम गुरु होते हैं। बच्चा माता-पिता के वचनों पर चले तो निश्चित रूप से उसका उद्धार होगा। इसलिए बच्चों को अपने अभिभावकों पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र चौधरी, डॉ. दीप्ति पराशर, प्रो.डॉ.मनोज तंवर और गैर शिक्षण स्टॉफ से अतुल गोयल, राम निवास, एसएन शर्मा, सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।