Home haryana आस्था, श्रद्धा व पवित्रता से ही किसी तीर्थ की महत्ता है : ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी

आस्था, श्रद्धा व पवित्रता से ही किसी तीर्थ की महत्ता है : ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी

by ND HINDUSTAN
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ब्रह्मसरोवर आरती में शामिल हुए जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी 

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। देश के विभिन्न राज्यों में शिक्षा, गौ सेवा, संस्कृत, चिकित्सा, अध्यात्म, तकनीकी इत्यादि क्षेत्रों में संचालित श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने कात्यायनी मंदिर के समक्ष ब्रह्मसरोवर पर विधिवत आरती की तथा पूजा अर्चना की। इस अवसर पर प. बलराम शर्मा के परिवार के सदस्यों ने परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी का स्वागत किया एवं आरती में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया। इस मौके पर ब्रह्मचारी के साथ जयराम विद्यापीठ से खरैती लाल सिंगला, राजेश सिंगला, प्रवेश राणा, यशपाल राणा, रोहित कौशिक, सतबीर कौशिक, रणबीर भारद्वाज व प. राजेश प्रसाद लेखवार शास्त्री भी मौजूद थे। ब्रह्मचारी जिस समय आरती में पहुंचे गीता के श्लोकों व मंत्रोच्चारण से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

आरती के उपरांत ब्रह्मचारी ने कहा कि किसी भी तीर्थ की महत्ता श्रद्धालुओं के आस्था, श्रद्धा एवं पवित्रता से है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से उत्पन्न हुई पावन गीता का संदेश पूरे विश्व में मानव समाज के कल्याण के लिए पहुंच रहा है। कुरुक्षेत्र तीर्थों की संगम स्थली है। यहां के तीर्थों की अपनी विशेष महत्व है। इन्हीं तीर्थों पर ऋषि मुनियों ने तप किया है। ब्रह्मचारी ने कहा कि कुरुक्षेत्र वह भूमि है जहां मोक्ष की प्राप्ति होती है। मानव समाज के कल्याण के लिए यहां के तीर्थों की महत्ता विश्व के कोने कोने में पहुंचनी चाहिए। यहां के तीर्थों का बहुत ही पौराणिक महत्व है। कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण का जहां अनेकों बार आगमन हुआ है तो महान संत महापुरुषों के पैर इस धरती पर पड़े हैं। सूर्यग्रहण व अमावस्या इत्यादि अन्य अवसरों पर ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर पर स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। अगर तीर्थों की महत्ता संसार भर में पहुंचेगी तो देश के अन्य तीर्थों की भांति यहां भी प्रतिदिन हजारों लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे। तीर्थों की महत्ता को जन जन तक पहुंचाने में स्थानीय लोग भी काफी योगदान दे सकते हैं। ब्रह्मसरोवर आरती के उपरांत परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने कात्यायनी मंदिर में भी पूजा अर्चना की। 

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