मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने गोपाष्टमी पर्व पर गौसेवा का संकल्प लिया
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र।भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति में गाय का विशेष महत्व है। गोपाष्टमी का पर्व संपूर्ण रूप से गौ सेवा को समर्पित है। यह पर्व जहां हमें एक ओर गौ पालन के महत्व एवं गौ संवर्धन के लिए प्रेरित करता है वहीं दूसरी ओर यह पर्व गौसेवा का संकल्प दिलाता है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पर्व गोपाष्टमी के अवसर पर आश्रम परिसर में आयोजित गौसेवा कार्यक्रम में व्यक्त किए। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने गोपाष्टमी पर्व पर गौसेवा का संकल्प लिया। मातृभूमि सेवा मिशन की कामधेनु गौशाला में आयोजित इस कार्यक्रम में गायों की वैदिक विधि विधान से पूजा की गई।
डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि प्राचीन भारत के विचारकों ने गाय के महत्व को पहचाना था और उन्होंने पाया कि गाय का दूध स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है, बैलों से खेती, आवागमन के साधन, एवं माल वाहन, गोमूत्र से खाद, कीटनाशक एवं औषिधिय उपयोग तथा भूमि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु गोबर खाद ही उत्तम है। गौ आधारित कृषि की ग्राम स्वालंबन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। गौ की महिमा मंडित करते हुए गाय को माता का स्थान दिया। गाय को धर्म में इस तरह गूंथ दिया की भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र में अनेक धार्मिक मत-मतोतरों के होते हुए भी गाय को सभी ने पूज्यनीय माना। आज गौ पालन एवं गौ संवर्धन के अभाव में आत्मनिर्भर भारत का निर्माण स्वपन जैसी कल्पना है।
डॉ. श्रीप्रकाश ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भी गाय की सेवा करके गोपाल, गोविन्द आदि नामों से पुकारे गये। जब तक गौ आधारित स्वावलंबी खेती होती रही तब तक भारत विकसित धनवान राष्ट्र रहा, यहां की सम्पदा के लालच में दूसरे देशों को लोग भारत पर आक्रमण करते रहे और भारत निरंतर कमजोर होता रहा। जिसका दूषपरिणाम हमारे देश की संस्कृति, सभ्यता, परंपरा एवं जीवनशैली पर बहुत अधिक पड़ा। आज आधुनिक भारत में गांव में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए तथा कृषकों की आय में वृद्धि के लिए हमें पुनः गौ आधारित स्वावलंबी कृषि की ओर वापस जाना होगा। बदले हुए हालात में आज कम से कम गाय के दूध का उत्पादन बढ़ाकर तथा गोबर व गौमूत्र की प्रयोग से रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च व गौमूत्र के प्रयोग से रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को बचाकर ग्राम लक्ष्मी का पुनः आह्वान किया जा सकता है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि आज शुद्ध दूध के अभाव में हमारे देश में नाना प्रकार की बीमारियां जन्म ले रही है। जिसके कारण उचित चिकित्सा के अभाव में, संसाधन के अभाव में एवं बीमारियों के दूषपरिणाम से लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं। आज देश में बेरोजगारी, कुपोषण, भूखमरी, पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक आपदाओं जैसी अनेक जटिल समस्याओं का समाधान गौ पालन एवं गौ संवर्धन से ही संभव है।