कुरुक्षेत्र को धर्मनगरी ही रहने दें, मौजमस्ती का न बनाया जाए अड्डा : प्रो. सिन्हा
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संस्थापक चेयरमैन स्व. गुलजारी लाल नंदा के निकट सहयोगी रहे प्रोफेसर हिम्मत सिंह सिन्हा ने हरियाणा के महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को पत्र लिखकर पवित्र ब्रह्मसरोवर को नौकाविहार द्वारा भ्रष्ट किए जाने की योजना को तुरंत प्रभाव से रोकने की अपील की है। महामहिम राज्यपाल को लिखे पत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं केडीबी के पूर्व सदस्य प्रोफेसर सिन्हा ने लिखा है कि धन के प्रलोभन में बोर्ड में बैठे कुछ लोग कुरुक्षेत्र की पवित्रता को भ्रष्ट करने का कार्य कर रहे हैं। बोर्ड इस तीर्थ को आस्था तथा श्रद्धा का केंद्र बनाने की बजाए नौकाविहार स्थल जैसे विलासिता, मौजमेला तथा अय्यासी का केंद्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
स्व. नंदा जी को यदि इस बात का आभाष होता कि इस पवित्र सरोवर को आस्था का नही विलासिता का केंद्र बनाया जाएगा तो वे अपने जीवन के 22 वर्ष यहां व्यर्थ ना करते। डा. सिन्हा ने लिखा है कि नौकाविहार में लेशमात्र भी आस्था और पवित्रता नही होती केवल भ्रष्ट आचरण ही होता है। इस प्रकार इस सरोवर की पावनता को भ्रष्ट करके नंदा जी के मुख पर कालिख पौतने तथा उनको अपमानित करने का कार्य किया जा रहा है। ब्रह्मसरोवर में नौकाविहार शुरु होने से कुरुक्षेत्र में लोग धार्मिक आस्था से नही बल्कि मौज मेले तथा मनोरंजन की दृष्टि से आया करेंगें।
नगर की कई सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं से जुडे प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. सिन्हा ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि इन लोगों को इस तीर्थ की पवित्रता तथा प्राचीनता का लेशमात्र भी ज्ञान नही है कि यह तीर्थ सृष्टि का आदि सरोवर है जिसका वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा तथा उनके पूर्वजों ने अब तक इस तीर्थ की पवित्रता को बनाए रखा है लेकिन अब यहां धर्म को बेचकर मनोरंजन तथा नौकाविहार का केंद्र बनाकर भ्रष्ट किया जा रहा है। उन्होने राज्यपाल से अपील की है कि वे धर्म और संस्कृति के संरक्षक है इसलिए कुरुक्षेत्र को धर्मनगरी ही रहने दें, मनोरंजन तथा विहरण की नगरी न बनने दें और पवित्र सरोवर को नौकाविहार के द्वारा भ्रष्ट किए जाने की योजना रोकने के लिए शीघ्र आदेश देने की कृपा करें। प्रो. सिन्हा ने राज्यपाल से आशा की कि वे सरोवर की पवित्रता को सरंक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाकर तीर्थ मर्यादा की रक्षा करेंगें।