Home haryana मॉरीशस,यूएस,यूके जैसे देशों में भारतीय लोक संस्कृति को दिखाने का मिला अवसर:मालिनी अवस्थी

मॉरीशस,यूएस,यूके जैसे देशों में भारतीय लोक संस्कृति को दिखाने का मिला अवसर:मालिनी अवस्थी

by ND HINDUSTAN
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हरियाणवी रागनी की रही दीवानी, विदेशी धरती पर भी भारतीय कलाकारों का है पूरा मान-सम्मान

भगवान श्रीकृष्ण की उपदेश स्थली में भजनों की प्रस्तुति देने का हुआ एक अलग अहसास

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। पदमश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि मॉरीशस, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी जैसे देशों में भी भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को बड़े चाव से लोग देखते हैं। इन सभी देशों के मंचों पर उन्हें भारतीय लोक कला दिखाने का अवसर मिला और सभी जगहों पर भारतीय संस्कृति को खूब पसंद किया गया। इतना ही नहीं विदेशी धरती पर भी भारतीय कलाकारों का पूरा मान-सम्मान किया जाता है। पदमश्री मालिनी अवस्थी ने गत देर सांय अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2021 में ब्रह्मïसरोवर पुरूषोत्तमपुरा बाग में पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय लोक कला, लोक संगीत, लोक नृत्य पूरी दुनिया में सबसे अलग है। इनसे शरीर में ऊर्जा पैदा होती है और सभी देशों की लोक संस्कृति से अमीर संस्कृति है भारत देश की।

इस संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने का अपना एक अलग आनन्द मिलता है। उन्होंने कहा कि देश के साथ-साथ विदेश में पहली बार 1998 में इंग्लैंड में प्रस्तुति देने का मौका मिला। इसके बाद मॉरीशस, अमेरिका और पाकिस्तान में भी परफॉर्मेंस दी। उन्हें केन्द्रीय चुनाव आयोग ने ब्रांड एम्बेसडर बनाया। उन्होंने कहा कि संगीत की साधना के कारण ही उन्हें यह मुकाम मिला। जहां कहीं भी प्रस्तुति के लिये जाती हैं, वहां पर लोगों का भरपूर प्यार व सहयोग मिलता है। उन्होंने कोरोना काल में देश, दुनिया को छोड़ चुके लोगों को श्रद्घांजलि देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र की भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था कि मनुष्य को कर्म करना चाहिए और फल की इच्छा नही करनी चाहिए और परमात्मा के आगे किसी का जोर नही चलता।

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव जैसे मंच पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा पर भजनों की प्रस्तुति करना उनका एक सौभाग्य है और हरियाणा की इस पावन भूमि की रागनी उन्हें बेहद पसंद है। अपनी संगीत दादी, बाबा के बारे में दो लाइने सुनाते हुए कहा कि अरे अम्मा, मेरे बाबा को भेजों रे, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा, जिसे विश्व भर में पहचान मिली और आज भी बहुत ही ख्याति प्राप्त है, इस भजन को लोग बड़े चाव से सुनते हैं।

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