जयराम विद्यापीठ की रंगोली और दीपमाला बनी विशेष आकर्षण का केंद्र, देश विदेश में ऑनलाइन मिली जोरदार सराहना
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। वर्ष 1989 से वैसे तो ब्रह्मसरोवर के तट पर श्री जयराम विद्यापीठ में आयोजित होने वाला गीता जयंती महोत्सव हर वर्ष देश विदेश में बैठे श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। हर वर्ष देश के कोने कोने से और विदेशों से भी बड़ी संख्या में इस महोत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी के मार्गदर्शन में गीता जयंती महोत्सव के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण का संदेश जन जन तक पहुंचाने की गुरु परम्परा नियमित तौर पर जारी है और आने वाले वर्षों में और भी भव्य एवं नवीनतम स्वरूप में होगी। जयराम संस्थाओं के मीडिया प्रभारी राजेश सिंगला ने कहाकि इस वर्ष कोरोना महामारी से बचाव के चलते नियमों की पालना करते हुए गीता जयंती के कार्यक्रमों को संक्षिप्त किया गया था लेकिन परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से जयराम विद्यापीठ में जितने भी कार्यक्रम आयोजित हुए उन्हें देश विदेश में भारी सराहना मिली है। विद्यापीठ के कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने सभी ट्रस्टियों एवं श्री जयराम गीता जयंती आयोजन कमेटी के सभी सदस्यों का धन्यवाद किया है।
मंगलवार को गीता जयंती के दिन ब्रह्मसरोवर के तट पर विद्यापीठ के ट्रस्टियों, संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों, श्रीमती केसरी देवी लोहिया जयराम पब्लिक स्कूल, सेठ नवरंग राय लोहिया जयराम कन्या महाविद्यालय, श्री जयराम बी एड कालेज, हरबक्श राय लोहिया जयराम पॉलिटेक्निक तथा जयराम संस्कृत महाविद्यालय के शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ सदस्यों ने जहां गीता जयंती की शुभकामनाओं का पावन संदेश देते हुए रंगोली बनाई वहीं 11 हजार दीपक प्रज्वलित कर दीपदान किया। सिंगला ने कहा कि जयराम विद्यापीठ के ब्रह्मसरोवर की परिक्रमा की शोभा यात्रा गीता जयंती महोत्सव का वास्तविक स्वरूप बनी। जिसमें विद्यापीठ के ट्रस्टी, श्रद्धालु, यजमान, ब्रह्मचारी व सेवकों सहित बड़ी संख्या में आम जन भी जुड़े। परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने भी कहाकि गीता श्लोकोच्चारण करते हुए परिक्रमा करना ही गीता जन्मोत्सव मनाना है। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में उत्साह के साथ युवा एवं बच्चों का जुड़ना भी बताता है कि उन्हें भी गीता से लगाव है। अगर गीता आमजन के जीवन में उतरती है तो जीवन की बहुत सी समस्याओं का समाधान होगा।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने मुखारविंद से जो गीता का संदेश हजारों वर्ष पूर्व दिया था उसमें आज भी प्रत्येक मानव की चिंताओं, दुःखों और दुविधाओं का निवारण केवल गीता में ही विद्यमान है। गीता तो मानव को जीवन जीने की कला सिखाती है। सिंगला ने बताया कि ब्रह्मसरोवर के तट पर जयराम विद्यापीठ के विद्यार्थियों एवं ब्रह्मचारियों द्वारा बनाई गई रंगोली तो देश विदेश में भी ऑनलाइन माध्यम से देखी गई। उन्होंने बताया कि विद्यापीठ की ओर से गीता जयंती पर की गई हजारों दीपों की माला तो विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। इस दीपमाला और दीपदान में विद्यापीठ के श्रद्धालुओं के साथ आमजन भी जुड़े। बड़ी संख्या में लोगों ने श्री जयराम विद्यापीठ गीता जयंती महोत्सव के नाम से दीपमाला सजाई। देश के अन्य राज्यों और विदेशों में बैठे लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से इस भव्य दीपमाला की सराहना करते हुए कहाकि उन्हें लगता है कि वे भी गीता जयंती महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। इस मौके पर ट्रस्टी श्रवण गुप्ता, राजेंद्र सिंघल, सुरेंद्र गुप्ता, के के कौशिक, ईश्वर गुप्ता, खरैती लाल सिंगला, पवन गर्ग, के सी रंगा, हरि सिंह, सतबीर कौशिक, रोहित कौशिक, यशपाल राणा, प्रवेश राणा, मंजू सिंगला, एस एन गुप्ता, प्राचार्य रणबीर भारद्वाज व आचार्य राजेश प्रसाद लेखवार शास्त्री इत्यादि भी मौजूद थे।