मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सपनों को साकार करेगा राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान
वन एवं शिक्षा मंत्री कंवरपाल की पहल पर प्रकृति ज्ञान बनेंगे वनस्पतियों के औषधीय ज्ञान का मंच
न्यूज डेक्स संवाददाता
पंचकूला। औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना सैक्टर 5 डी श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड पंचकूला परिसर में आयुष मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। विदित है कि इस संदर्भ में राष्ट्ीय वन्य जीव बोर्ड ने प्रस्तावना की अनुमति प्रदान कर दी है। इस संदर्भ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का यह सपना कि प्रत्येक नागरिक औषधीय वनस्पतियों को पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्द्धन के लिए हरियाणा के सर्वसमाज को पर्यावरण के दायित्व बोध से जोड़ने का कार्य करेगा तथा इस संस्थान में प्राकृतिक चिकित्सा पाकर लाखों लोग लाभान्वित होंगे।
हरियाणा के वन एवं शिक्षा मंत्री कंवरपाल जी ने कहा कि ज्ञान के सभी मंदिरों में स्थापित प्रकृति ज्ञान केन्द्र के माध्यम से इस संस्थान के शोध कार्य और शैक्षणिक उपलब्धियों को अध्ययन सामग्री के रूप में प्रस्तुत करके नयी पीढ़ी को भारतीय आयुर्वेद परंपरा के संस्कार से रूबरू कराने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण काल में भारतीय चिकित्सा पद्धति ने जिस प्रकार से जन सामान्य के प्राण रक्षा का कार्य किया है वह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति आधुनिक समय में भी प्रासंगिक ही नहीं अनिवार्य भी है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक जगदीश चन्द्र ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने जिस प्रकार से जीवन पद्धति में वनस्पतियों के औषधीय महत्व को रेखांकित करते हुए धार्मिक मान्यता प्रदान की, वह हमारे अघ्यात्म जीवन संस्कृति में प्रकृति रक्षा के लिए नागरिक दायित्व निर्वहन की परंपरा हैं। अब समय आ गया है जब नयी पीढ़ी को प्रकृति रक्षा का सहयात्री बनाने के लिए सभी वनस्पति प्रजातियों के औषधीय महत्व को जन-जन में प्रचारित किया जाए।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान 8.04 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्मित होगा। इसकी कुल लागत 5 करोड़ रूपये स्वीकृत की गयी है, जिसे चरणबद्ध तरीके से उपयोग किया जायेगा। इसके निर्माण में वन एवं वन्य जीव संबंधी कानूनों/नियमों और निर्देशो का पालन करना होगा। इस संस्थान के निर्माण से हरियाणा के सर्व समाज को वनस्पति जगत के औषधीय महत्व को माता मनसा देवी परिसर में आने वाले भक्त जनों के माध्यम से एक बड़ा जन समुदाय प्रकृति रक्षा का सहयात्री बन सकेगा।