Home Kurukshetra News नेताजी सुभाष चंद्र बोस का दिल्ली चलो नारा,7 साल में फौगाट के दिल्ली के 100 गेट पास

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का दिल्ली चलो नारा,7 साल में फौगाट के दिल्ली के 100 गेट पास

by ND HINDUSTAN
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श्रीभगवान फौगाट दिल्ली गृहमंत्रालय के स्वतंत्रता सेनानी विभाग और चंडीगढ़ के लगा चुके हैं 100-100 चक्कर

न्यूज डेक्स हरियाणाा

रेवाड़ी,18 अगस्त। आजादी से पहले दिल्ली चलों का नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था, अब आजादी के 73 साल हो चुके हैं और पिछले 7 साल से रेवाड़ी निवासी श्रीभगवान फौगाट सिर्फ इसलिये दिल्ली के स्वतंत्रता सेनानी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं कि किसी तरह से वे नेताजी की आजाद हिंद फौज में सहयोगी रहे स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों को उचित सम्मान दिलाने में मदद कर सकें।

अभी तक फौगाट 100 से ज्यादा बार दिल्ली में गृहमंत्रालय के स्वतंत्रता सेनानी विभाग में जा चुके हैं,जबकि 100 से ज्यादा बार ही वह चंडीगढ़ सिविल सचिवालय के चक्कर काट चुके हैं। यह चक्कर लगाकर वह बहुत कुछ करने में सफल हुए हैं और अभी बहुत कुछ करना बाकी है। फौगाट की रगों में अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता का खून है और वही जुनून उन्हें ना थकने और ना हारने का प्रेरणा देता है। फौगाट अनगिनत चिट्टियां केंद्र और राज्य सरकार को भेज चुके हैं।

फौगाट ने मीडिया को बताया है कि उनके पास गृह मंत्रालय के स्वतंत्रता सेनानी विभाग और चंडीगढ़ सिविल सचिवालय तक जाने के 100-100 गेट पास रिकार्ड में रखे हैं। मुझे दुःख होता है कि भारत की आजादी के लिये अपना सब कुछ न्यौछावर करने और अपने से दूर रहकर कई तरह के कष्ट और यात्नाएं झेलने वाले अनगिनत वीर सपूतों को गुमनाम बना कर छोड़ दिया गया है।

आज इनके परिवारजन इनका रिकार्ड खंगालने के लिये स्वतंत्रता सेनानी विभागों के चक्कर लगा रहे हैं,लेकिन उस रिकार्ड को क्यों छुपाया जा रहा है,सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है,यह उनके जैसे भारत के अनेक लोगों की समझ से परे है।

फौगाट रेवाड़ी के डीसी से लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को जो पत्र भेज चुके हैं उनमें नियम 1980 की शर्तों का बार-बार हवाला दिया गया है। फौगाट के अनुसार इन शर्तों का पालन कर स्वयं गुमनाम आजाद हिंद फौज सिपाहियों की जांच कर पहले राज्य सम्मान पेंशन आवेदनकर्ताओं को देना चाहिये।

यह नियम कहते हैं और यह भी नियम है कि राज्य सरकार द्वारा यह स्वीकार करने और सम्मान देने के बाद ही फाइल को केंद्रीय सम्मान पेंशन की सिफारिश की जाती है। इसके बाद केंद्रीय स्वतंत्रता सेनानी कार्यालय में उपलब्ध राज्य स्वतंत्रता सेनानियों का रिकार्ड मिलने पर इन्हें केंद्रीय सम्मान पेंशन दिया जाता है।

मैं यही मांग कर रहा हूं कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को पहले उनका सम्मान दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि मुझे रिकार्ड दिखाया जाए तो कई गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के रिकार्ड सहित सामने आ सकते हैं। फौगाट ने इसी के साथ मीडिया से यह अपील की है कि वे अपने टीवी चैनलों,अखबारों में यह बात प्रकाशित करें और दिखाएं कि जिन परिवारों के सदस्य ब्रिटिश आर्मी में रहे और दूसरे विश्वयुद्ध का हिस्सा बने थे, वे उनका रिकार्ड,नंबर उन तक पहुंचा दें तो मैं उनका रिकार्ड खोज सकता हूं।

फौगाट ने बताया कि उन्होंने जब भी सरकारों को पत्र लिखे तो इन पत्रों पर कार्रवाई के नाम पर हरियाणा के सभी जिलों के डीसी को पत्र तो भेजे गये थे,मगर संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों ने उचित कार्रवाई नहीं की। यहां तक की गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों और जिन स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को उचित सम्मान नहीं मिला हैं,उनके पुत्र,पुत्रियों,पौते पौतियों ने डीसी को इस संदर्भ में पत्र भी भेजे है,मगर इन पर कार्रवाई तो दूर,इनसे संपर्क तक नहीं किया गया,जबकि पालिसी 1980 के तहत डीसी को अगर किसी स्वतंत्रता सेनानी की रिकार्ड मिलता है, तो उसकी फाइल बनाकर तत्काल राज्य सरकार को भेजनी होती है,लेकिन वे भेज नहीं रहे,जिसकी वजह से अनेकों गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी और इनके परिवार आजादी के 73 साल बाद भी उचित सम्मान से वंचित हैं।

फौगाट का कहना है कि बगावत करने के कारण ना तो इनके परिवारों को ब्रिटिश सेना से आर्थिक मदद मिली थी और ना ही आजादी के बाद इन्हें स्वतंत्रता सेनानी होने का गौरव हासिल हुआ। फौगाट का कहना है कि सम्मान पेंशन से वंचित रहने के पीछे और भी कई कारण रहे,इनमें सबसे बड़ा कारण आजादी के बाद आजाद हिंद फौज के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं माना गया था,लंबे अर्से के बाद जब इन्हें उस श्रेणी में लाया गया तो बहुत नेताजी की सेना के सेना के बहुत कम लोगों को ही अब तक इसका लाभ मिल सका, जबकि इस सेना में 85 हजार से ज्यादा सैनिक थे,मगर आजादी के बाद 73 वर्षों में कितनों सम्मान मिला है यह पूरा भारत और देश की केंद्र और राज्य सरकारें जानती हैं।

एक दिन पहले भी फौगाट ने डीसी रेवाड़ी को ज्ञापन दिया है। इसमें नियम 1980 के तहत सरकार ने आजाद हिंद फौज सिपाहियों व शहीद सिपाहियों की विधवाओं को नियमानुसार राज्य स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन दिये जाने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय स्वतंत्रता सेनानी सम्मान दिये जाने की सिफारिश करने का प्रावधान किया गया है। पुनःयाद दिलाया जा रहा है कि गुमनाम सिपाहियों व शहीद सिपाहियों की विधवाओं,आश्रितों की अस्वीकार केंद्रीय व राज्य स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन फाइल रिपोर्ट कार्यालयों में है।

इनका रिकार्ड आजाद हिंद फौज नामिनल रोल राष्ट्रीय अभिलेखागार पहुंचाया गया है। यह जांच कना राज्य स्वतंत्रता सेनानी कार्यालय का काम है। अतः माननीय मुख्य सचिव स्वतंत्रता सेनानी कार्यालय नियम 1980 की शर्तों का पालन कर स्वयं गुमनाम आजाद हिंद फौज सिपाहियों की जांच कर पहले राज्य सम्मान पेंशन आवेदनकर्ताओं को दें,इसके उपरांत केंद्रीय सम्मान पेंशन की सिफारिश करें।

केंद्रीय स्वतंत्रता सेनानी कार्यालय में उपलब्ध राज्य स्वतंत्रता सेनानियों की अस्वीकार फाईल (आजाद हिंद) फौज मंगवाकर,उनका रिकार्ड आजाद हिंद फौज की जांच कर आवेदनकर्ताओं को पहले राज्य स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन दें। यह नियम 1980 की शर्तों के आधार पर उचित है,इसके उपरांत केंद्रीय सम्मान पेंशन उनको दिया जा सकता है।

फोटो साभार राष्ट्रीय अभिलेखागार के रिकार्ड से

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