न्यूज डेक्स संवाददाता
चंडीगढ़। आज संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रोहतक में किसान संगठन आल इंडिया किसान खेत मज़दूर संगठन ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इस मौके पर एआईकेकेएमएस के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया की बीजेपी की केंद्र की सरकार अपने चहेते पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए तीन काले कानून लेकर आई थी जोकि किसानों के आंदोलन के दबाव में वापिस लेने पड़े थे। लेकिन एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर एक कमेटी गठित करने की बात की थी जिस से अब पीछे हट रही है। इसके खिलाफ किसानों में भारी गुस्सा है। उन्होंने बताया की जब तक किसान आंदोलन को और मजबूत नहीं किया जाएगा तब तक यह सरकार मानने वाली नहीं है। इस मौके पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड सत्यवान ने बताया कि सरकार अपने चेहेते पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मंडियों को बंद कर रही है और सीधा अदानी अंबानी के गोदामों से किसानों को जोड़ रही है। उन्होंने बताया अभी बिजली बिल 2021 भी पेंडिंग है किसानों पर दर्ज मुकदमे अभी पेंडिंग है।
लखीमपुर खीरी के हत्यारे जमानत पर बाहर घूम रहे हैं और निर्दोष किसान जेलों में बंद है ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते से डेरी किसान के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। जैव विविधता कानून 2002 में संशोधन से किसानों की जैविक संपदा को खतरा है। एफएसएसएआई के नए नियम बनाकर जीएम खाद्य पदार्थों को पिछले दरवाजे से घुसाने की कोशिश हो रही है। एफसीआई के नए गुणवत्ता मानक से फसल की खरीद में कटौती की कोशिश की जा रही है। अब भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के नियम बदल कर पंजाब और हरियाणा सरकार द्वारा मनोनीत प्रतिनिधियों की जगह केंद्र सरकार की पसंद मुताबिक सदस्य लगाने का फैसला किसान और देश की संघीय व्यवस्था पर एक और हमला है। इस रोष पत्र के माध्यम से देश के अन्नदाता ने सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा प्रेषित किया है। इस मौके पर आल इंडिया किसान खेत मज़दूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड सत्यवान, प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल, प्रदेश स्तरीय नेता रामफल सुहाग, छात्र नेता उमेश मौर्य व राजेश, रामू हूड्डा शामिल हुए।