सीएम को पुलिस की लाठी का दर्द जानना है तो पूछें रामबिलास और कटारिया से
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र, 22 सितंबर। हरियाणा के पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा पिपली में किसानों पर पुलिस द्वारा कोई लाठीचार्ज न किए जाने के ब्यान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री घमंड से भरे हुए हैं लेकिन घमंड तो रावण का भी टूट गया था। मुख्यमंत्री की आंखों पर घमंड की पट्टी चढी हुई है उनको चाहिए कि घमंड की पट्टी उतारें। मुख्यमंत्री कांड की जांच करवाने की बजाए दो मिनट में ही स्वयं जांच कर पुलिस को क्लीनचिट दे रहे हैं। सीएम ने किसानों को राहत देने की बजाए उनके जख्मों पर नमक छिडकने का काम किया है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए अशोक अरोड़ा ने कहा कि जजपा नेताओं द्वारा किसानों पर चलाई गई लाठी को चौ. देवीलाल के परिवार पर पडी लाठी बताया गया। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने इस कांड की जांच करवाने की बात कही थी, अब जांच रिपोर्ट तो मुख्यमंत्री ने दे दी है। इसलिए यदि दुष्यंत चौटाला में थोडी सी भी नैतिकता है तो उन्हे प्रदेश भाजपा सरकार से तुरंत समर्थन वापिस लेकर आंदोलनरत किसानों के साथ खडा होना चाहिए।
अरोड़ा ने कहा कि एक ओर तो भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष उनके तीन सांसद स्थानीय भाजपा विधायक सहित सहयोगी दल जजपा के नेता पिपली में 10 सितंबर को किसानों पर लाठीचार्ज किए जाने को दु:खदाई बता रहे हैं और जजपा नेता घायल किसानों को सम्मानित कर रहे हैं। दूसरी ओर गृहमंत्री के बाद अब मुख्यमंत्री लाठीचार्ज किए जाने को नकार रहे हैं।
अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आजतक जनता के मुद्दों को लेकर न तो लाठी खाई और न ही किसी आंदोलन में जेल गए। इसलिए मुख्यमंत्री को क्या पता कि पुलिस की लाठी की चोट क्या होता है। मनोहर लाल ने तो केवल सत्ता का सुख भोगा है। यदि मनोहर लाल को पुलिस के लाठी के दर्द का पता करना हो तो वह भाजपा के पूर्व मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा तथा केंद्रीय राज्यमंत्री रत्नलाल कटारिया से जानकारी ले सकते हैं।
फसलों का समर्थन मूल्य बढाने पर प्रतिक्रिया देेते हुए अरोड़ा ने कहा कि केंद्रीय सरकार ने 50 रूपए प्रति क्विंटल गेहूं का एमएसपी बढाकर किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। पिछले दो महिने में डीजल के रेट काफी बढे हैं। कीटनाशक, खाद और बीज के दामोंं में बढोतरी हुई है। चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार एक क्विंटल गेहूं की पैदावार पर तीन हजार रूपए खर्च आता है। इसलिए सरकार को कम से कम खर्चे से डेढ गुना गेहूँ का एमएसपी निर्धारित करना चाहिए था।
उन्होने कहा कि आज देश का अन्नदाता अपनी खेती बाडी पूंजीपतियों के चंगुल से बचाने के लिए सडकों पर है। लेकिन सरकार देश के किसानों को पूंजीपतियों के चंगुल में फंसाने पर लगी हुई है। प्रदेश सरकार को घोटालों की सरकार बताते हुए अरोड़ा ने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में धान घोटाला चावल घोटाला, भूमि रजिस्ट्री घोटाला, शराब घोटाला जैसे बडे-बडे घोटाले हुए लेकिन जांच के नाम पर लीपापोती कर सरकार आरोपियों को बचाने में लगी हुई है। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव सुभाष पाली, कांग्रेसी नेता पवन चौधरी, दलीप दयालपुर, उपस्थित थे।