Home haryana अंबाला नगर परिषद द्वारा जारी आदेश को कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती, सोनीपत निगम के चुनाव टालने हेतु 3 बार किया था कानूनी संशोधन – एडवोकेट हेमंत

अंबाला नगर परिषद द्वारा जारी आदेश को कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती, सोनीपत निगम के चुनाव टालने हेतु 3 बार किया था कानूनी संशोधन – एडवोकेट हेमंत

by ND HINDUSTAN
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हरियाणा म्युनिसिपल कानून, 1973  अनुसार नव-गठित न.प. की  पहले चुनाव एक वर्ष में होने चाहिए

न निर्धारित समय में चुनाव करवाए गए, न  टालने हेतु  किया गया  कानूनी संशोधन

एडवोकेट हेमंत ने उठाया मुद्दा,जारी की विज्ञप्ति

न्यूज डेक्स हरियाणा

चंडीगढ़। हरियाणा के गृह, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा  सहित कुल 6  विभागों के    कैबिनेट मंत्री  अनिल विज के गृहक्षेत्र अम्बाला कैंट  के  गैर-कैंटोनमेंट शहरी  क्षेत्र हेतु  सदर (कैंट ) नगर परिषद (न.प.) का पुनर्गठन   हुए अढ़ाई वर्ष से ऊपर हो गए हैं। 11 सितम्बर 2019 को  शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी एक गजट नोटिफिकेशन से  तत्कालीन संयुक्त अम्बाला नगर निगम में से सदर  क्षेत्र को बाहर कर उसके   लिए अलग न.प. नोटिफाई की गयी थी।

2 वर्ष पूर्व  मार्च, 2020 में  सदर न.प. के लिए  कुल  31 वार्ड निर्धारित किये गए  थे, जबकि  31 दिसंबर 2020 को उनकी  फाइनल वार्डबंदी की नोटिफिकेशन जारी हुई। गत वर्ष   9 फरवरी 2021  को उन वार्डों में  से  कौन कौन से वार्ड महिलाओ, अनुसूचित जाति (एससी) और पिछड़े वर्ग (बीसी ) के व्यक्तियों (उम्मीदवारों ) हेतु  आरक्षित होंगे, इस बारे  नोटिफिकेशन जारी की गयी थी। मार्च, 2022  में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा  सदर  न.प.  क्षेत्र के सभी 31 वार्डों की फाइनल प्रकाशित मतदाता सूचियों अनुसार वहां की कुल मतदाता  संख्या करीब पौने दो लाख है।

 इसी बीच शहर   निवासी पंजाब एवं हरियाणा  हाई कोर्ट के एडवोकेट   हेमंत कुमार ने  बताया कि आगामी एक-दो माह   में  राज्य निर्वाचन  आयोग द्वारा करवाए जाने वाले  पहले आम  चुनाव में   सदर न.प. अध्यक्ष/प्रधान  के  पद  को हालांकि गत वर्ष  13 जुलाई 2021 को विभाग द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में  सामान्य वर्ग के व्यक्ति के लिए आरक्षित दर्शाया गया  है, परन्तु वास्तव में यह पद   अनारक्षित / ओपन  होगा  अर्थात इस पद के   लिए हर  जाति या वर्ग के   योग्य पुरुष/महिला  द्वारा चुनाव लड़ा जा सकता है. वर्ष 2019 में हुए कानूनी संशोधन के बाद न.प. अध्यक्ष का चुनाव स्थानीय मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है   जैसे हर वार्ड से नगर परिषद सदस्य (पार्षद ) का निर्वाचन होता है।

 बहरहाल,   हेमंत ने बीते डेढ़  वर्ष अर्थात 11  सितम्बर, 2020 से अम्बाला   सदर  न.प.  के  कानूनी अस्तित्व पर सवाल  उठाते हुए इस सम्बन्ध  में कई बार विभाग के  मंत्री तत्कालीन मंत्री अनिल  विज, जिनके पास दिसम्बर,  2021 तक शहरी निकाय विभाग भी था और वर्तमान मंत्री डॉ. कमल गुप्ता और विभाग के  प्रशासनिक सचिव एवं निदेशक को कई बार लिखा  परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उन्होंने लिखा  कि हरियाणा म्युनिसिपल (नगरपालिका)  कानून, 1973 ,   जो  सभी नगरपालिकाओं और नगर परिषदों पर लागू होता है, की वर्तमान धारा 12(2) के अनुसार नव गठित (पुनर्गठित भी)  नगर परिषद और नगर पालिका के पहले आम चुनाव उन्हें  अधिसूचित/घोषित करने के एक वर्ष के भीतर  राज्य निर्वाचन  आयोग द्वारा करवाए जाने चाहिए।

अब चूँकि  सदर न.प. पुर्नगठित होने  के निर्धारित एक वर्ष के भीतर  अर्थात 10 सितंबर, 2020 तक, बेशक कोरोना-वायरस संक्रमण  फलस्वरूप  व्याप्त परिस्थितियों या अन्य किसी कारण से, इसके पहले आम चुनाव नहीं करवाए जा सके, अत: ऐसी  परिस्थिति  में उपरोक्त  1973 कानून की  धारा  12 (2 )  में हरियाणा विधानसभा द्वारा   संशोधन करना  आवश्यक था    ताकि उक्त चुनाव करवाने  की मौजूदा एक वर्ष की समय सीमा को आगे बढ़ाया जा सके   एवं  सदर नगर  परिषद  का  कानूनी अस्तित्व कायम रखा जा सके परन्तु आज तक ऐसा नहीं किया गया है।

हेमंत ने बताया कि गत वर्ष  अगस्त,2020  में  प्रदेश विधानसभा द्वारा  हालांकि  हरियाणा नगर निगम (संशोधन) कानून, 2020  पारित किया गया जिसके द्वारा हरियाणा में  नई  नगर निगम के पहले आम चुनाव उसको नोटिफाई करने से साढ़े पांच वर्षो तक करवाएं जाने का प्रावधान किया गया। इसका सीधा प्रभाव  जुलाई, 2015 में नगर परिषद को अपग्रेड कर बनायी गई  सोनीपत नगर निगम पर हुआ एवं उसके पहले चुनाव  27  दिसंबर 2020 को करवाये गए. इससे पहले वह  समय सीमा पांच वर्ष अर्थात सोनीपत न.नि. के पहले  चुनाव जुलाई,2020 तक करवाए जाने थे। उससे पूर्व वर्ष 2019 और 2018 में भी दो बार कानूनी संशोधन किया गया था।

हेमंत ने  एक बार पुन:  हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की मौजूदा धारा 12(2) में  उपयुक्त  संशोधन करवाने का आह्वान किया है। कुछ माह पूर्व उनकी याचिका पर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी इस सम्बन्ध में शहरी निकाय विभाग को लिखा  है। अगर ऐसा नहीं किया जाता,  तो बीते डेढ़  वर्ष  से अर्थात 11 सितम्बर 2020 से  सदर नगर परिषद्  द्वारा किये गए सभी आधिकारिक कार्यों / कार्य-कलापों पर  गंभीर कानूनी प्रश्नचिन्ह उत्पन्न होने  कारण  कोई भी प्रभावित व्यक्ति या संस्था इस अवधि में उसके  विरूद्ध पारित  आदेशों और निर्देशों को  चुनौती देते हुए अदालत जा सकता है।अगर आगामी कुछ महीनों में आम चुनाव करवा भी लिए जाते हैं, फिर भी उपरोक्त कानूनी संशोधन आवश्यक होगा।

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