प्रदेश की बनाई जाए अलग से राजधानी : कर्ण दलाल
कुरुक्षेत्र को हरियाणा की राजधानी बनाने की मांग उठाई कर्ण दलाल ने
पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा ने किया कर्ण दलाल की मांग का समर्थन, जनता की ओर से जताया आभार
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। हरियाणा के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांगेसी नेता कर्ण दलाल ने प्रदेश की अलग राजधानी बनाने की मांग उठाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हरियाणा सरकार को अलग से राजधानी बनानी चाहिए। उन्होंने कुरुक्षेत्र को हरियाणा की राजधानी बनाने का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक तीर्थ स्थल है इसे राजधानी बनाने से विश्व भर में कुरुक्षेत्र की ख्याति फैलेगी। वे बुधवार को कुरुक्षेत्र में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विश्वासपात्र माने जाने वाले जलेश शर्मा के निवास स्थान पर पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। इस अवसर पर पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा, कांग्रेसी नेता जलेश शर्मा, पूर्व पार्षद विवेक मैहता विक्की, मन्नू जैन, गौरव शर्मा गौरी, युवा कांग्रेस के हल्का प्रधान इशान शर्मा तथा शेखर शर्मा मौजूद रहे।
कर्ण दलाल ने कहा कि चंडीगढ 27 हजार एकड़ में फैला हुआ है। जिस पर 40 प्रतिशत हिस्सा जोकि 11 हजार एकड़ बनता है, हरियाणा का है। इस 11 हजार एकड़ भूमि का क्लेक्टर रेट से पैसा पंजाब सरकार या केंद्र सरकार हरियाणा को दे, ताकि हरियाणा की अलग राजधानी बनाई जा सके। उन्होने कहा कि चंडीगढ़ में हरियाणा की हैसियत एक किराएदार जैसी है। यह शहर अब बुढ़ा हो चुका है, अब तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद चंडीगढ़ को मांग रहें हैं इसलिए हरियाणा सरकार को देरी न करके अलग राजधानी बनाने की दिशा में पहल करनी चाहिए।
उन्होंने कुरुक्षेत्र को राजधानी बनाने की पुरजोर पैरवी करते हुए कहा कि चौ. बंसीलाल की सरकार में जब वे मंत्री थे तो उस समय चौ. बंसीलाल का सपना कुरुक्षेत्र को हरियाणा की राजधानी बनाने का था,लेकिन बदलते हालात के कारण चौ. बंसीलाल इसे अमलीजामा नही पहना सके। अब समय आ गया है कि इस धार्मिक और ऐतिहासिक शहर को राजधानी बनाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पहल करनी चाहिए।
पलवल से पांच बार विधायक रह चुके कर्ण दलाल ने चंडीगढ़ को राजनेताओं और बाबुओं का शहर बताते हुए कहा कि इस शहर में हरियाणा के लोगों का कोई मान सम्मान नही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पलवल और होडल जैसे दूर दराज से चंडीगढ़ आने वाले लोगों का 2200 रूपए तो टोल ही लग जाता है। एसवाईएल का जिक्र करते हुए कर्ण दलाल ने कहा कि पानी के बंटवारे के लिए गठित इराड़ी आयोग की ओर हरियाणा सरकार कोई ध्यान नही दे रही। इस आयोग ने हरियाणा को मिलने वाले सतलुज और रावी के पानी का बंटवारा करना है। आयोग के दफ्तर में बैठे बाबूओं को केवल तनख्वाह दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल को लेकर हरियाणा के हक में फैसला दिया हुआ है।
दलाल ने सभी दलों के नेताओं से दलगत राजनीति से उपर उठकर अलग राजधानी बनाने के मुद्दे पर समर्थन करने की अपील की और कहा कि वे पूरे प्रदेश में जाहर इस मुद्दे पर जनता को जागृत करेंगें। कर्ण दलाल ने कहा कि जब हरियाणा की अलग से राजधानी होगी तो प्रदेश का अपना हाईकोर्ट, अपनी विधानसभा, अपनी पीजीआई, इपना एयरपोर्ट होगा जिसका आने वाली पीढियों को लाभ होगा क्येांकि इस समय चंडीगढ में स्थापित सभी चीजों पर पंजाब का बोलबाला है।
पत्रकार वार्ता में उपस्थित हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व थानेसर से चार बार विधायक चुके अशोक अरोड़ा ने कर्ण दलाल की मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए उनका कुरुक्षेत्र की जनता की ओर से आभार जताया और कहा कि कुरुक्षेत्र को प्रदेश की राजधानी बनाने से यह धार्मिक नगरी विश्व के मानचित्र पर ओर अधिक ख्याति प्राप्त करेगी। पूर्व मंत्री अरोड़ा ने कहा कि थानेसर राजा हर्षवर्धन की राजधानी भी रही है और अब भगवान कृष्ण की कर्मभूमि कुरुक्षेत्र को राजधानी बनाने से प्रदेश का अपना हाईकोर्ट, अलग से विधानसभा और अलग से ही एयरपोर्ट होगा जिसका लाभ प्रदेश की जनता को मिलेगा।