सीता पर गलती से बोले तो, सुरजेवाला की जगह आए कांग्रेस के जय राम
न्यूज डेक्स संवाददाता
चंडीगढ़। लगता है जुबां फिसलने के मामले में भारत वर्ष के राजनेता दुनियाभर में शीर्ष पर होंगे।अक्सर इस तरह के बोल बच्चन मीडिया में हर राजनीतिक दल से निकल कर सामने आते रहते हैं। विशेष रुप से चुनावी सीजन में। दरअसल,राजस्थान की राज्यसभा सीटों के चुनाव से पहले कांग्रेस के प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक प्रेसवार्ता की थी। इस प्रेसवार्ता में उनके साथ कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेता भी वहां मौजूद रहे। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सुरजेवाला ने भाजपा पर तीखा प्रहार किया था।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ईडी,सीबीआई जैसी एजेंसियों के सहारे लोकतंत्र का उसी प्रकार चीर हरण कर रही है,जैसे सीता मइया का चीर हरण हुआ था,जबकि यह उदाहरण देते हुए सुरजेवाला भूल चूक का शिकार हो गए,क्योंकि चीर हरण माता सीता का नहीं,बल्कि एक युग बीतने के बाद महाभारतकाल में द्रोपदी का हुआ था। रणदीप सिंह सुरेजवाला की इस प्रेसवार्ता का सिर्फ यही अंश उनके कांग्रेस मीडिया प्रभारी पद पर भारी पड़ गया। उनके यह बोल बच्चन वाला अंश सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। विरोधियों और भाजपा के आईटी सैल को बैठे बिठाए सुरजेवाला पर तीखे प्रहार करने का मौक़ा मिल गया।सोशल मीडिया पर सुरजेवाला के इस उदाहरण की ना केवल कड़े शब्दों में निंदा की,बल्कि सुरजेवाला और कांग्रेस पर भद्दे कमेंट भी सोशल मीडिया पर तैरते दिखे।
बताते हैं सुरजेवाला की यह टिप्पणी कांग्रेस के बड़े घर,यानी सोनिया दरबार तक भी पहुंची थी। यह बताने वाले कौन है,यह भी आप समझ गए होंगे,जिन्हें सुरजेवाला फूटी आंख भी भाते नहीं होंगे।खैर राजनीति में इस तरह की सुरसुराहट के अपने मायने होते हैं। वे कई बार तुके से निशाने पर लगे तीर जैसे सिद्ध हो जाते हैं। और भले कुछ सिद्ध हो ना हो,मीडिया में सुर्ख़ियां ज़रूर बनवाने का मादा रखते है। अब सुरजेवाला के बयान वाली वायरल हो रही वीडियो के अंश के साइड इफ़ेक्ट अगले दिनों में विरोधियों के लिए तुरुप का पत्ता ना बने,उससे पहले 16 जून को खबर आई की सुरजेवाला को मीडिया के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अपने प्रवक्ता काल में सुरजेवाला कांग्रेस की बात प्रखर अंदाज में मीडिया के सामने रखते आए हैं। उनका अंदाज कांग्रेस के एक बड़े खेमे और उनके चाहने वालों को काफी लुभाता भी था,मगर भारतीय संस्कृति की समझ के मामले में कांग्रेस के यह नेता मात खा गए। सुरजेवाला भूल गए माता सीता और द्रोपदी के कालखंड में एक युग का अंतर है। तुर्रा ये कि प्रेसवार्ता में साथ बैठे नेताओं को भी नहीं मालूम नहीं था कि सुरजेवाला जो चीर हरण बता रहे हैं, वो उदाहरण गलत है। अगर इन्हें पता होता तो संभवतः उन्हें बता कर गलती मौके पर ठीक हो जाती और सुरजेवाला का मीडिया का प्रभार जय राम को नहीं जाता।