खादी न सिर्फ रोजगार में मदद करती है बल्कि आर्थिक साधन भी प्रदान करती है : सतपाल
कुरुक्षेत्र, 24 अगस्त : कुरुक्षेत्र के खादी ग्रामोद्योग संघ मिर्जापुर नरड़ के मुख्य व्यवस्थापक सतपाल सैनी ने गांधी जयंती से पूर्व संस्थान की महीना भर चलने वाली योजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि 17वीं सदी से अब तक आधुनिकता का सफर करने वाली खादी ने भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में अपनी अलग पहचान बना ली है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खादी पर चर्चा करते हुए कहा है कि अब तो खादी की एक अलग पहचान बन गई है। खादी युवा पीढ़ी के लिए फैशन का नया ट्रेंड सेट कर रही है। सैनी ने कहा कि अगर देखा जाए तो फैशन इंडस्ट्री में खादी को एक नई पहचान मिली है। बकायदा ब्रांडिड कपड़ों से हटकर खादी के फैशन शो हो रहे हैं और खादी के फैशन शो का भी एक अलग जलवा होता है। संस्थान के सचिव ने बताया कि सन 1989 में केवीआईसी द्वारा मुंबई में पहला खादी फैशन शो किया गया था। जहां 80 से अधिक तरह के खादी वस्त्रों को प्रदर्शित किया गया था। उसके बाद सन 1990 में मशहूर फैशन डिजाइनर रितु बेरी ने दिल्ली के क्राफ्ट म्यूजियम में प्रतिष्ठित ट्री ऑफ लाइफ शो में अपने खादी कलेक्शन को पेश किया। जिससे फैशन इंडस्ट्री में खादी को एक नई पहचान मिली। सतपाल सैनी ने बताया कि 1990 के दशक से खादी की काफी डिमांड बढ़ गई। आरामदेह होने के कारण समय के साथ आम लोगों के बीच काफी लोकप्रियता बढ़ी है। हालांकि जब खादी मार्किट में अपनी अलग पहचान के साथ उतरी खादी को हर एक ब्रांड से भी टॉप क्वालिटी का दर्जा मिला और यह एक फायदे का सौदा साबित हुआ। खादी अब न सिर्फ रोजगार में मदद करती है बल्कि आर्थिक साधन भी प्रदान करती है। सैनी ने कहा कि भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मन की बात में कई बार खादी के महत्व तथा उसको प्रोत्साहित करने पर बल दिया है। मोदी ने एक समारोह मे खादी को बढ़ावा देने के लिये नारा दिया था “राष्ट्र के लिए खादी, फैशन के लिए खादी”। इसके परिणामस्वरूप खादी का अधिक व्यापार होना शुरु हो गया। सैनी ने कहा कि अंग्रेजों की गुलामी से लेकर खादी ने आधुनिक भारत का सफर जो सभ्यता से फ़ैशन तक का सफर तय किया है। इस भाग दौड़-भरी जिंदगी में लोग तरह-तरह के कपड़ो का तो इस्तेमाल करते हैं, लेकिन भारत के परंपरा में तो खादी तथा खादी के बने कपड़ो का काफी महत्व रहा है। आजादी की लड़ाई में, महात्मा गांधी ने ग्रामीण स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए खादी को बढ़ावा देना शुरू किया। उसके बाद खादी भारतीयों के लिए केवल कपड़ा हीं नहीं बल्कि एक विचार है।