इनेलो नेता की ताकत का इस्तेमाल कर नब्बे हजार सालाना की दुकान आश्री ने तीन हजार में हथियाई
वाह रे आरटीआई एक्टिविस्ट ,जरा लगा कर देखो खुद के कारनामों की आरटीआई
छाज तो बोल्लै सो बोल्लै,या छालणी भी बोल्लै,जिस मै छत्तीस सौ बात्तर छेद
21 साल का ब्याज लगाकर वसूली जाए पवन आश्री से राशि
सीएम और स्थानीय निकाय मंत्री को भेजी शिकायत
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र।हरियाणा में ये कहावत आम है, छाज तो बोल्लै सो बोल्लै या छालणी भी बोल्लै,जिस मै छत्तीस सौ बात्तर छेद। इस खबर का मुख्य किरदार भाजपा का कथित नेता भी बिलकुल वैसा ही है। उसे हर अच्छाई में बुराई दिखती है। कोई भी सीधा काम टेढ़ा नजर आता है। दूसरों के सही काम गलत और उसके गलत काम भी ठीक। यदि उसे किसी अधिकारी को धमकाना हो तो वह उसे नूंह और मेवात भिजवाने की धमकी देता है। अगर यूनिवर्सिटी का कोई अधिकारी कर्मचारी उसके नाजायज काम को करने या उसकी भद्दी भाषा का उलट कर जवाब देता है तो वह उसे राज्यपाल को शिकायत करने की धमकी देता है। जिस भाजपा नेता ने उसे भाजपा बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष बनवाया था,उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर खुल कर दुष्प्रचार,जिस विधायक ने उसे मुंह लगाया,उसकी प्रधामंत्री और देश गृहमंत्री तक भूमाफिया की छवि बताने,यहां तक भाजपा के एक कद्दावर नेता के खिलाफ भी इसी तरह की शिकायतें वह कर चुका है।
अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भेजी गई उसकी यह दर्द गाथा पिछले दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। अपनी हरकतों की वजह से कई बार डांट फटकार और लोगों से अच्छे खासे ढंग से सेवा करना चुके इस कथित भाजपा नेता पवन आश्री के पिछले तथ्यों के साथ रखे गए हैं,अगला प्रस्तुत है। काबिलेगौर है कि देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी केयू ने कैसे थाली में सजा कर अंग्रेजी विषय को 100 में से 33 अंक लेकर 10 वीं पास करने वाली पवन आश्री की धर्मपत्नी को कलर्क की नौकरी हरियाणा में कांग्रेस सरकार के दौरान दी गई थी।
यकीन मानिये अगर पवन आश्री की धर्मपत्नी की तरह इस तरह नौकरी दिये जाने की सुविधा हर बेरोजगार को मिलती तो हरियाणा वासी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को तीर्थस्थल मान कर जीविकोपार्जन तीर्थ की उपाधि दे देते। नौकरी कैसे दी,शिकायत विजिलेंस जांच का क्या हुआ ? इस विषय में पूरा खाका अगली रिपोर्ट में,मगर इस रिपोर्ट में पवन आश्री की कारगुजारियों का एक बड़ा झोल यह दिखा रहे है कि कैसे कथित भाजपा नेता पवन आश्री ने कांग्रेस सरकार में ही नहीं,बल्कि इनेलो सरकार में भी एक बड़ा लाभ उठाया था। आप सोचेंगे कि जो पवन आश्री खुद को पूर्व में भाजपा युवा मोर्चे में महत्वपूर्ण पदों पर होने के होर्डिंग लगाता है और अगर वह इतना सक्रिय नेता था तो कांग्रेस ने और फिर इनेलो ने उसको लाभ कैसे पहुंचाया ? जबकि छोटे बड़े भाजपा नेता तो इनेलो सरकार के दौरान त्राहिमाम कह रहे थे,तो पवन आश्री पर इनेलो कृपा कैसे हुई ?
रूको जरा विस्तार से बताते हैं, वो कृपा क्या ?
हरियाणा में 1999 से पहले चुंगी व्यवस्था हुआ करती थी।बस अड्डे और रेलवे स्टेशनों के समीप नगर परिषद और पालिका कर्मी यह चुंगी वसूल करते थे।मगर जैसे ही 1999 में इनेलो की सरकार बनी तो तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने चुंगी व्यवस्था को खत्म कर दिया। कुरुक्षेत्र शहर में भी कई जगह चुंगी के दफ्तर थे। इसी तरह का एक दफ्तर शास्त्री मार्केट और बिरला मंदिर के बीच डा.सुरेंद्र सहाय के अस्पताल के समीप था। मगर 1999 के बाद यह दफ्तर बंद पड़ा था,मगर नगर परिषद थानेसर के अधिकार क्षेत्र में था। इस दफ्तर पर नजर पड़ गई एक कथित भाजपा नेता पवन आश्री की। उसने उस दौर में ओमप्रकाश चौटाला के तीसरे पुत्र कहे जाने वाले प्रदेश के कद्दावर इनेलो नेता की सिफारिश से इस दुकान को हासिल का जुगाड़ तैयार किया। बस फिर क्या था, कथित आरटीआई एक्टिविस्ट पवन आश्री इसी जुगाड़पंथी से वो करने में सफल हुए,जिसे तीन साल से बंद बड़ी दुकान को कोई भी शहरवासी हासिल करने में सफल नहीं हो सका था।
ना नीलामी,ना बोली,पवन आश्री ने दुकान खोली
डा.सहाय अस्पताल के निकट वर्षों से बंद पड़े चुंगी आफिस को इनेलो सरकार में जुगाड़पंथी के सहारे भाजपा के कथित नेता पवन आश्री ने हथिया लिया। यह कार्यालय ना तो किसी संस्था का था और ना ही किसी व्यक्ति विशेष का,जो बिना बोली कराए फैसला ले और मनमर्जी से किसी को सौंप दे। यह कार्यालय था थानेसर नगर परिषद का। नियमानुसार इसकी नीलामी होनी चाहिए थी और नीलामी से पहले पूरी प्रक्रिया को अपनाना था,मगर कुछ नहीं हुआ और बगैर नीलामी और बोली के इस बेशकीमती कार्यालय की चाबी पवन आश्री को किरायेदार मान कर सौंप दी गई थी।अंधे को क्या चाहिए दो आंख और पवन आश्री ने यह दुकान खोल कर अपनी मेज कुर्सी सजा दी।
डीसी के आदेश पर रद्द हुई पवन आश्री की दुकान
किसी सरकारी जगह को बगैर नीलामी प्रक्रिया और बोली के कैसे पवन आश्री को थानेसर नगर परिषद का किरायेदार बना दिया गया,जब यह मामला तत्कालीन डीसी अभिलक्ष लिखी के सामने पहुंचा तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए पवन आश्री की किरायेदारी को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के आदेश दिए थे और साथ ही पवन आश्री को दुकान से बाहर करने के भी आदेश देने के साथ इस चुंगी कार्यालय को सरकारी नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने और नीलामी पर ऊंची बोली देने वाले उम्मीदवार को ही दुकान किराये पर देने के आदेश दिए थे।
पवन आश्री को 3 हजार सालाना पर दी गई दुकान 90 हजार रुपये सालाना किराये पर चढ़ी डीसी के आदेश के बाद पवन आश्री की किराएदारी निरस्त कर बाहर किया गया। इसके बाद सही प्रक्रिया के तहत नीलामी रखी गई और सबसे ऊंची बोली देने वाले जिला कुरुक्षेत्र के थानेसर वासी शामलाल पुत्र रामकुमार को 90 हजार रुपये सालाना यानी 7500 रुपये महीने किराए पर यह दुकान अलाट की गई थी।
अगर डीसी संज्ञान ना लेते तो हर साल सरकार को करीब एक लाख का होता नुकसान
पवन आश्री के कारनामे पर अगर तत्कालीन डीसी संज्ञान नहीं लेते तो राज्य सरकार को हर साल करीब एक लाख रुपये का नुकसान होता।वहीं अगर पवन आश्री का यह कारनामा उजागर नहीं होता तो वह बड़ी आसानी से सरकार को हर साल 3000 रुपये देकर 87 हजार रुपये का चूना लगाता रहता। यह न्यूज डेक्स के आरोप नहीं है,बल्कि वो काला सच है,जो पवन आश्री या कोई भी नागरिक आरटीआई लगाकर नगर परिषद थानेसर के रिकार्ड में दर्ज इस कारनामें की हकीकत जान सकता है। वहीं इसकी हकीकत वो ऊंची बोली देने वाला किरायेदार शामलाल पुत्र रामकुमार भी बयान कर सकता है।
ना राष्ट्रपति को शिकायत की ना पीएम,राज्यपाल या सीएम को,गलत का निपटारा लोकल स्तर पर हुआ लोगों को डराने,धमकाने और कीचड़ उछालने के अनगिनत मामले पवन आश्री की फेहरिरस्त में दर्ज हैं।इनकी लिस्ट लंबी है,इनमें शासन प्रशासन और शिक्षण संस्थानों और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के अधिकारी,कर्मचारियों से हुए विवादों को तथ्यों के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा,इसके बाद निर्णय और सवाल आपका। काबिलेगौर है कि पवन आश्री के दुकान वाले कारनामे को उजागर करने और सरकार को चूना लगने से बचाने के लिए ना तो राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,राज्यपाल या मुख्यमंत्री को शिकायत करने की नौबत आई और ना ही कुछ और करना पड़ा,बल्कि सच सामने आते ही त्वरित कार्रवाई हुई और पवन आश्री का दुकान डकार कर सरकार को लाखों रुपये चूना लगाने का इरादा ढेर हो गया।यह तथ्य इसलिए प्रस्तुत किए जा रहे हैं,यदि इस तरह के किरदारों को अगर कोई मौका मिले तो क्या कर सकते हैं ? वैसे भी राष्ट्र भक्त और एक्टिविस्ट कहने से कोई राष्ट्रभक्त या एक्टिविस्ट नहीं हो जाता।
21 साल का ब्याज लगाकर वसूली जाए पवन आश्री से राशि कुरुक्षेत्र वासी एक नागरिक ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत हरियाणा के मुख्यमंत्री और स्थानीय निकाय मंत्री को भेजने के साथ यह मांग की है कि पवन आश्री ने जितने महीनें इस दुकान पर 250 रुपये किराये पर रहते हुए सरकार को जितनी राशि को चूना लगाया,उसकी वसूली ब्याज सहित की जाए,क्योंकि उसने 7500 रुपये महीने वाली दुकान का इस्तेमाल 250 रुपये में किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में प्रति तोले सोने का रेट पांच हजार रुपये से भी कम था और आज 50 हजार रुपये से ऊपर का रेट है। उन्होंने बताया कि पवन आश्री ने जितने महीने भी किराये पर दुकान इस्तेमाल की उसकी कुल राशि को जोड़ कर 21 साल का ब्याज वसूल किया जाए,यदि सरकार ने इस पर कार्रवाई नहीं की तो वह इस मामले में कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे,क्योंकि यह सीधे सीधा सरकार को चूना लगाने और जनहित में खर्च होने वाले राजस्व की चोरी का मामला है। इस प्रकरण में आपराधिक मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया,यह भी बड़ा सवाल है।