न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। थानेसर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण लीडरशिप भले लंबे समय से हाशिए पर हो,लेकिन बड़े अंतराल के बाद ब्राह्मणों के अलग अलग धड़े अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर एकजुट और एकमंच पर खड़े दिखाई दिए। साठ के दशक में थानेसर नगर पालिका के आखिरी चेयरमैन स्वतंत्रता सेनानी पंडित बालकृष्ण मुज्जतर थे,लेकिन उसके बाद दो बार ब्राह्मण नेता आपसी फूट की वजह से नगर परिषद थानेसर के चेयरमैन पद के करीब जाते जाते रह गए।
इनमें पहला मौका कांग्रेस की सरकार में 2005 के दौरान ब्राह्मण युवा नेता जलेश शर्मा को मिला था,वे चेयरमैन पद के दावेदार तो बने थे,लेकिन धडे़बंदी के बीच पार्षदों का समीकरण साधने में विफल हो गए थे। हालांकि नगर परिषद थानेसर के वाइस चेयरमैन 1995 में जयनारायण शर्मा और उनके बाद राजगौड़ भी रहे,लेकिन पंडित बालकृष्ण मुज्जतर के बाद परिषद में बतौर चेयरमैन अगला ब्राह्मण चेहरा अब तक नहीं मिला।अलबत्ता यह कारनामा लगातार तीन बार पार्षद रह चुके अखिल भारतीय सारस्वत ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा निंदी 2010 में दोहरा सकते थे,लेकिन तब उनकी किश्ती भी किनारे के करीब आकर गोता खा गई थी।
इसी तरह 1977 में थानेसर विधानसभा सीट पर पहली बार युवा छात्र नेता देवेंद्र शर्मा ने जीत दर्ज की थी,लेकिन देवेंद्र शर्मा के बाद आज तक कोई ब्राह्मण नेता थानेसर सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा की सीढ़ी नहीं चढ़ा। यह भी कह सकते हैं कि किसी अहम दल ने ब्राह्मण नेता को टिकट नहीं दिया,अगर दिया तो ज्यादातर बार घोर प्रतिकूल परिस्थितियों में दिया गया,जिसकी वजह से खुद देवेंद्र शर्मा 1991 में कांग्रेस की टिकट पर,उसके बाद 2009 में बसपा की टिकट पर बड़े अंतर से पराजित हो चुके हैं। वहीं धर्मनगरी के बड़े ब्राह्मण नेता श्री प्रकाश मिश्रा 1996 आजाद चुनाव लड़े,मगर देवेंद्र का इतिहास दोहराने में विफल रहे। इन चेहरों पर ब्राह्मण वोटर क्यों नहीं चढ़े,इसके पीछे कुछ कारणों के अलावा प्रमुख वजह आपसी धड़ेबंदी को बताया जाता है,लेकिन लंबे अंतराल के बाद आज भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर जिस तरह की एकजुटता का वातावरण ब्राह्मण समाज ने बनाया। इसी वातावरण देवेंद्र शर्मा और पंडित बालकृष्ण मुज्जतर वाले इतिहास को दोहराने की तैयारी के रुप में बताया जा रहा है।
आज भगवान परशुराम जयंती पर धर्मनगरी की अग्रणी धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्था श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा,अखिल भारतीय तीर्थपुरोहित महासभा, हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास,अखिल भारतीय सारस्वत ब्राह्मण महासभा और छात्र संगठन बीपीएसओ सहित इनसे जुड़ी ब्राह्मणों की अन्य कई संस्थाएं भगवान परशुराम चौक रेलवे रोड पर आयोजित पुष्पांजली समारोह से लेकर यहां से शुरु हुई शोभायात्रा एवं प्राचीन कालेश्वर महादेव तीर्थ पर यात्रा के विराम और समारोह में यह एकजुटता नजर आई।दावा किया जाता है कि थानेसर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण निर्णायक वोटर की भूमिका में हो सकते हैं,क्योंकि यहां 25 हजार से अधिक का वोट संख्या बल ब्राह्मणों के पास है। अगले साल यानी 2024 में होने जा रहे विधानसभा के चुनाव है। इसके अलावा थानेसर नगर परिषद के चेयरमैन पद के चुनाव होने हैं। विधानसभा और परिषद में उम्मीदवारी तय करते समय ब्राह्मणों की यह एकजुटता कितना असर डालेगी यह तो वक्त बताएगा,मगर आज चर्चा आम रही कि इस एकजुटता में पुरानी टीस छुपी है,जिसका निवारण दोनों में से एक जीत दर्ज करने पर संभव हो सकता है।यह टीस मंच पर कुछेक नेताओं ने अपने समाज के गौण प्रतिनिधित्व के प्रति कई बार जाहिर भी की।
कई धड़ों में बंटे ब्राह्मण समाज को भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर एकसूत्र में पिरोने की यह कवायद ब्राह्मण नेता पवन शर्मा पहलवान और ब्राह्मण नेता जयनारायण शर्मा की बताई जा रही है। परिणाम स्वरूप आज भाजपा नेता जयभगवान शर्मा डीडी,कांग्रेसी नेता एवं इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन जलेश शर्मा,अखिल भारतीय सारस्वत ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा निंदी,कांग्रेसी नेता लक्ष्मीकांत शर्मा, कांग्रेसी नेता विवेक भारद्वाज डब्बू, युवा ब्राह्मण नेता अशोक शर्मा पहलवान,श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के अध्यक्ष श्याम सुंदर तिवारी और प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा,संत समाज के कई चेहरों के अलावा शिव शक्ति सेवा मंडल के चेयरमैन एमके मौद्गिल,जय मां दुर्गा जयमहाकाल ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेश मौद्गिल और मां शाकंभरी देवी सेवक मंडल के अशोक बाली के अलावा कई संगठनों के नेताओं की मौजूदगी रही।