Home Kurukshetra News इतिहास सनातन संस्कृति में मां पृथ्वी पर विधाता की प्रतिनिधि के समान कि – डा. श्रीप्रकाश मिश्र

इतिहास सनातन संस्कृति में मां पृथ्वी पर विधाता की प्रतिनिधि के समान कि – डा. श्रीप्रकाश मिश्र

by ND HINDUSTAN
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मातृदिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा वात्सल्य संवाद कार्यक्रम संपन्न

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। हमारे वेद,दर्शनशास्त्र, स्मृतियां, महाकाव्य, उपनिषद आदि सब मां की अपार महिमा के गुणगान से भरे पड़े हैं। असंख्य ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों, पंडितों, महात्माओं, विद्वानों, दर्शनशास्त्रियों, साहित्यकारों और कलमकारों ने भी माँ के प्रति पैदा होने वाली अनुभूतियों को कलमबद्ध करने का भरसक प्रयास किया है। इन सबके बावजूद माँ शब्द की समग्र परिभाषा और उसकी अनंत महिमा को आज तक कोई शब्दों में नहीं पिरो पाया है। यह विचार मातृदिवस के उपलक्ष्य में मातृ भूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित वात्सल्य संवाद में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थिओ आयोजित  मातृवंदना से हुआ।

विद्यार्थियों ने मां से संबंधित गीत, कविता एवं प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किये। डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा माँ वह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार स्वतः उमड़ पड़ता है और मनोःमस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र में डूब जाता है। माँ वो अमोघ मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर पीड़ा का नाश हो जाता है। माँ की ममता और उसके आंचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है।  है। भारतीय संस्कृति में माँ को शक्ति का रूप माना गया है और वेदों में माँ को सर्वप्रथम पूजनीय कहा गया है।

डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा भारतीय संस्कृति में विशेषतः हिन्दू धर्म में हर दिन मातृ पूजा का विधान है। वैदिक ग्रन्थ एवं वेद-पुराणों में माताओं के विषय में विस्तार से बताया गया है। साथ ही सभी भारतीय अपने देश को ‘भारत मां’ कहकर ही संबोधित करते हैं। किसी भी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान में प्रमुख देवताओं के साथ माताओं की भी उपासना की जाती है। मातृ दिवस-समाज में माताओं के प्रभाव व सम्मान का उत्सव है। मां शब्द में संपूर्ण सृष्टि का बोध होता है। मां के शब्द में वह आत्मीयता एवं मिठास छिपी हुई होती है, जो अन्य किसी शब्दों में नहीं होती। मां नाम है संवेदना, भावना और अहसास का। कार्यक्रम में सहयोग एक कोशिश फाउंडेशन द्वारा बच्चों को इस अवसर पर उपहार वितरित किये गये। कार्यक्रम में अनिल कुमार, नीतू ठाकुर, मनीष सहित सहयोग फाउंडेशन एवं मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्यों सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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