न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में संस्कृति बोध परियोजना विषय को लेकर अखिल भारतीय कार्यशाला का शुभारंभ 20 मई को किया गया। बैठक में देशभर के आठ प्रदेशों से 27 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। बैठक के शुभारंभ की जानकारी देते हुए विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने बताया कि वर्तमान बदली परिस्थितियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परम्परा विद्यार्थियों तक पहुंचे, इस हेतु पाठ्यक्रम का निर्माण किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में देश बोध, समाज बोध, संस्कृति बोध एवं अध्यात्म बोध की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
कार्यशाला में मंचासीन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री अवनीश भटनागर, विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी, सचिव वासुदेव प्रजापति रहे। 20 से 22 मई तक चलने वाली संस्कृति बोध परियोजना पुस्तक पुनर्लेखन कार्यशाला के महत्वपूर्ण बिन्दुओं को अवनीश भटनागर जी ने बारीकी से समझाया। उन्होंने कहा कि संस्कार निर्माण संस्कृति के आधार के बिना संभव नहीं हैं जीवन मूल्य हमारी संस्कृति के मूल तत्व हैं। उन्होंने कहा कि आज नए स्वरूप में चीजों को नई पीढ़ी के सामने रखने की नितान्त आवश्यकता है। कुछ प्रश्नों के उत्तर याद कर लेना मात्र संस्कृति नहीं है। संस्कृति जीवन व्यवहार में आए। यदि यह जीवन व्यवहार में नहीं आ रही तो संस्कृति के कुछ तथ्यों को याद करने को हम बोध मान रहे हैं तो हमें अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। हमारे विचार करने का आधार यहां से प्रारंभ होना चाहिए। पुस्तक पुनर्लेखन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के बारे में नई पीढ़ी को अवगत कराना है।
कार्यशाला में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश से संस्कृति बोध परियोजना के विषय संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित, राघवेन्द्र शुक्ल, अजय तिवारी, राजकुमार, अंबिकादत्त कुंडल, विवेक नयन, यशपाल, गोपाल माहेश्वरी सहित प्रतिनिधि प्रतिभागिता भाग ले रहे हैं।