डॉ प्रदीप गोयल/न्यूज़ डेक्स संवाददाता
शाहाबाद । सूरजमुखी की फसल को भावांतर योजना में शामिल करने के सरकार के फैसले से किसान नेता सरकार के साथ-साथ आढ़तियों से भी नाराज है। रविवार को शाहाबाद अनाज मंडी की दोनों एसोसिएशन के प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा बिट्टू व धनपत्तराय अग्रवाल ने संयुक्त बैठक के उपरांत कहा कि हमनें सरकार से भावांतर योजना मांगी थी न कि एक हजार रूपए मांगें थे। उन्होंने कहा कि 1 जून से पहले किसान भाईयों की लिमिट की ब्याज, सूरजमुखी की कटाई कम्बाईन, सुखाई, नौकर बदलना, जमीन ठेका होता है जोकि कई करोड़ों रूपए बनते है। आढ़तियों के पास इस वक्त इतने पैसे नहीं होते क्योंकि पहले मंडी में गेंहू की फसल के 16-17 लाख कट्टे आते थे। लेकिन अब सूरजमुखी की फसल की वजह से 7 से 8 लाख कट्टे आते है। उन्होंने कहा कि 10 जून से धान लगावाई शुरू हो जाती है उसके लिए डीएपी, डिजल, ट्रेक्टर के लिए खर्च होते है। लेकिन सूरजमुखी की फसल के पैसे इस सारे काम के बाद आते है। जिस कारण इन दिनों में आढ़ती व किसान भाईयों के संबंध पैसे के कारण खराब हो रहे है। उन्होंने कहा कि हैफेड 4800 रूपए प्रति क्विंटल सूरजमुखी मांग रही है और भावांतर योजना का 1000 रूपए जो 5800 रूपए हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसान भाई सूरजमुखी
को सुखा कर घर वापिस लेकर जाता है और अपनी बारी आने पर जब फसल को लेकर आता है तब उसका खर्चा 500 रूपए प्रति क्विंटल आ जाता है। इसके इलावा शॉर्टेज, लेबर, ट्रॉली वगैरा का खर्चा अलग से पड़ता है। वहीं नई अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान बिट्टू कालड़ा ने कहा कि वह हमेशा से किसान भाईयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए है भारतीय किसान यूनियन के किसी भी आंदोलन में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है। लेकिन फिर भी कुछ किसान नेता आढ़तियों के बारे में बोल रहे है कि आढ़ती किसानों का साथ नहीं देते है जबकि आढ़तियों ने किसान यूनियन को 10 मई से सूरजमुखी की खरीद बारे आंदोलन करने को कहा था और इस आंदोलन में पूरी तरह साथ देने की बात भी कही थी। इस मौके पर आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य मौजूद थे।