मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में मनुष्य जीवन में स्वाध्याय का महत्व बिषय पर अध्ययन संवाद कार्यक्रम संपन्न
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। मनुष्य के जीवन में जितनी मात्रा में सद्ज्ञान होता है, उतना ही उसका जीवन सुखी होता है। अज्ञान मनुष्य के दुःखों का कारण होता है। ज्ञान आत्मा व परमात्मा विषयक भी होता है और संसार के पदार्थों व मनुष्य जीवन विषयक भी होता है। बिना परमात्मा और आत्मा को जाने मनुष्य पदार्थों का विज्ञान आदि से ज्ञान प्राप्त कर उनका उचित उपयोग करने में समर्थ नहीं होता। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा मनुष्य जीवन में स्वाध्याय का महत्व बिषय पर आयोजित अध्ययन संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किये।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक ब्रम्हचारियों द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने अध्ययन संवाद कार्यक्रम को सबोधित करते हुए कहा जीवन-निर्माण और सुधार संबंधी पुस्तकों का परमात्मा और मुक्ति की ओर ले जाने वाले ग्रंथों का अध्ययन, श्रवण, मनन, चिंतन आदि करना स्वाध्याय कहलाता है। आत्मचिंतन का नाम भी स्वाध्याय है। अपने बारे में जानना और अपने दोषों को देखना भी स्वाध्याय है। स्वाध्याय के बल से अनेक महापुरुषों के जीवन बदल गए और उनके द्वारा विपरीत परिस्थितियों में समाज का मार्गदर्शन हुआ। डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा
मनुष्य और अन्य प्राणियों के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण अन्तर यह है कि मनुष्य अपनी बुद्धि की सहायता से विचार व चिन्तन सहित सत्यासत्य का निर्णय करने व अध्ययन-अध्यापन करने में समर्थ है जबकि अन्य प्राणियों को ईश्वर ने मनुष्यों के समान बुद्धि नहीं दी है। मनुष्यों को दो प्रकार का ज्ञान होता है जिसे स्वाभाविक व नैमित्तिक ज्ञान कहते हैं। स्वाभाविक ज्ञान को सीखना नहीं होता वह स्वभावतः व स्वमेव ईश्वर प्रदत्त आत्मा में होता है और नैमित्तिक ज्ञान वह होता है जिसे मनुष्य आचार्यों, माता-पिता, स्वाध्याय, विचार, चिन्तन व अपने अनुभव आदि से सीखता है। डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा प्राचीन काल से ही ज्ञान प्राप्ति में मनुष्यों के सहायक विद्वान आचार्यों, अनुभवी माता, पिता तथा वृद्ध जनों के उपदेश हुआ करते हैं। यह चलते फिरते जीवित ज्ञान के कोष व भण्डार होते हैं। इन्होंने भी अपने पूर्वजों व विद्वानों से ही ज्ञान प्राप्त किया होता है।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा ज्ञान के अभाव में व्यक्ति की स्थिति नेत्रहीन जैसी हो जाती है। संसार के सारे दु:ख अज्ञान और अशक्ति से ही पैदा होते हैं। अज्ञानी व्यक्ति पाप प्रलोभनों में व वासना तृष्णा के गर्त में गिरता है। भौतिक जीवन की सफलता एवं आत्मिक जीवन की पूर्णता के लिए सबसे प्रथम सोपान ज्ञान की प्राप्ति है।मनुष्य जन्म की सफलता भी स्वाध्याय करने व उससे अर्जित ज्ञान से ईश्वरोपासना व समाज के हितकारी कार्य करने में ही है। स्वाध्याय से हम विवेक को प्राप्त होते हैं।अध्ययन संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों ने स्वाध्याय का संकल्प लिया। कार्यक्रम में संदीप, शिव शंकर सहित आश्रम के विद्यार्थी, शिक्षक ,सदस्य एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।