Home haryana श्रीकृष्णा आयुष विवि में विश्व का उच्च कोटि का संस्थान बनने की क्षमता- प्रो. सचदेवा

श्रीकृष्णा आयुष विवि में विश्व का उच्च कोटि का संस्थान बनने की क्षमता- प्रो. सचदेवा

by ND HINDUSTAN
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आयुष विवि के कार्यकारी कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के विदाई समारोह का हुआ आयोजन

न्यूज़ डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कार्यकारी कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का मंगलवार को विश्वविद्यालय परिवार द्वारा विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ किए कार्यों और उनकी व्यक्तिगत विशेषताओं को आपस में साझा किया। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि तीन महीने और चौदह दिन का कार्यकाल किसी भी कुलपति के लिए ज्यादा नहीं होता। मगर मेरा सौभाग्य है ऐसे उच्च कोटि के संस्थान और देश के पहले आयुष विवि में कुलपति के नाते कार्य करने का मौका मिला। यहां का शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ काबिल और कार्य के प्रति कितना ईमानदार है यह विश्वास तब पक्का हुआ जब उनके साथ कार्य किया। आयुष विवि विश्व का उच्च कोटि का संस्थान बन सकता है क्योंकि यहां के अधिकारी और कर्मचारी कार्य के प्रति पूर्ण रूप से निष्ठावान है। उन्होंने कहा कि कोई भी भौतिक चीज ऐसी नहीं है जो पॉजिटिव हो। नेगेटिव पर ध्यान न देकर चीजों को बदलें। आयुष विश्वविद्यालय अन्य आयुर्वेद विश्वविद्यालयों से कमतर नहीं है। आज जो कार्य इस संस्थान द्वारा किये जा रहे हैं या भविष्य में जो आयुष के सभी आयामों को बढ़ाने के लिए किए जाएंगे। उसका अनुसरण दूसरे आने वाले समय में जरूर करेंगे। मगर उसके लिए लगातार अनथक रूप से कड़ी मेहनत करते रहने की आवश्यकता है। कुलसचिव डॉ. नरेश भार्गव ने कहा कि जीवन में सीखने का दौर लगातार जारी रहता है। प्रथम गुरु माता-पिता, शिक्षक और समाज से व्यक्ति लगातार कुछ न कुछ सीखता रहता है। कुलपति महोदय ने जब से कार्यकारी कुलपति का कार्यभार संभाला उनका आशीर्वाद इस आयुष विवि को एक पिता के रूप में मिला है और आशा करते है आगे भी मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि कुलपति महोदय द्वारा शुरुआत के दिनों से सभी शाखाओं को एक टीम के रूप में कार्य करने के लिए आत्मविश्वास पैदा किया। जिसका असर भी देखने को मिल रहा है। आयुष की सभी विधाओं में ओपीडी चले इसकी नीव माननीय कुलपति के कार्यकाल में डल चुकी है। दरअसल किसी के कार्यकाल की अवधि मायने नहीं रखती। मगर उस कार्यकाल में चुनौतियों का हल करना और उचित समाधान निकालने से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व की ऊंचाई का पता चलता है। इस अवसर पर शैक्षणिक मामलों के अधिष्ठाता डॉ. शंभू दयाल, प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, डॉ. आशीष मेहता, डॉ. विदुषी त्यागी, डॉ. दीप्ति पराशर, डॉ. पीसी मंगल, डॉ. मनोज तंवर, डॉ. रवि राज, डॉ. सुधीर मलिक, डॉ. अशोक राणा, डॉ सचिन शर्मा, डॉ. शुभा कौशल, अतुल गोयल, विकास शर्मा, कर्नल एस.एन शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, भूपेंद्र सिंह, रामनिवास और रामकुमार चौहान आदि मौजुद रहे।

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