कीर्तन ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही पहली से शुरु हुआ नगर कीर्तन
पंज प्यारों की अगुवाई में सजाए नगर कीर्तन में शामिल हुई संगत
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र, 29 नवम्बर। श्री गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाश उत्सव को समर्पित धर्मनगरी के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही पहली से नगर कीर्तन सजाया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज की छत्रछाया में पंज प्यारों की अगुवाई में सजाए गए महान नगर कीर्तन में संगत ने शीश नवाया। उत्साह से लबरेज होकर संगत ने नगर कीर्तन में शिरकत की।
इससे पहले एसजीपीसी अंतरिम कमेटी मैंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना, शिरोमणि अकाली दल हरियाणा महिला विंग की प्रदेशाध्यक्षा बीबी रविंदर कौर, धर्म प्रचार कमेटी मैंबर जत्थेदार तजिंदरपाल सिंह लाडवा, शिअद प्रदेश प्रवक्ता कवलजीत सिंह अजराना, सुखजिंदर सिंह मसाना, एसजीपीसी सैकेटरी डा. परमजीत सिंह सरोह, ज्ञानी तेजपाल सिंह, सब आफिस प्रभारी परमजीत सिंह दुनियामाजरा, सिख मिशन इंचार्ज मंगप्रीत सिंह, ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी के मैनेजर अमरिंदर सिंह, शिअद जिला प्रधान जरनैल सिंह बोढी, राजिंद्र सिंह सोढी और शिरोमणि अकाली दल शहरी प्रधान तजिंदर सिंह मक्कड़ सहित अन्य ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष शीश नवाया।
इससे पहले जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना ने प्रकाश उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए संगत से बच्चों को गुरबाणी से जोडऩे का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चें कौम और देश का भविष्य हैं, इसलिए इन्हें अच्छे संस्कार देना अनिवार्य है। बच्चों को अच्छे संस्कार देने और आदर्श नागरिक बनाने का सबसे सरल माध्यम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हैं। यदि बच्चों को बचपन में ही गुरबाणी से जोड़ दिया जाए, तो फिर वें सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लडऩे में न केवल सक्षम बनेंगे, बल्कि कौम तथा देश हित में अपनी अहम भूमिका भी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हम सब को गुरु साहिबान की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करना चाहिए और अपने बच्चों को भी गुरु व पंथ इतिहास से जुडऩे के लिए प्रेरित करना चाहिए। बीबी रविंदर कौर अजराना ने कहा कि श्री गुरु
नानक देव जी महाराज द्वारा दी गई शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने जो शिक्षा एवं संदेश समाज को दियाए वह आज भी मनुष्य का मार्गदर्शक बनी हैं। गुरु साहिब ने चारों तरफ फैले अराजकता रूपी अंधकार में ज्ञान से प्रकाश किया और लोगों को अंध विश्वास त्याग कर मानवता भलाई की शिक्षा दी। उन्होंने भूखों को भोजन करवा कर लंगर प्रथा आरंभ की, जोकि आज भी जारी है। उन्होंने जात-पात और ऊंच.नींच के भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की।