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आज सामाजिक समरस समाज बनाने की महती आवश्यकता: नंदलाल जोशी

by ND HINDUSTAN
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सुखी, सार्थक, और यशमय जीवन का गहरा चिंतन-मंथन भारत की भूमि पर हुआ: नंदलाल जोशी

परिवारों में सकारात्मक ऊर्जा एवं उत्साह का वातावरण हेतु दिए टिप्स परिवार स्नेह मिलन एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का आयोजनॉ

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में परिवार स्नेह मिलन एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री नंदलाल जोशी वरिष्ठ प्रचारक रा.स्व. संघ रहे। मुख्यातिथि के रूप में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री अवनीश भटनागर एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी ने की। कार्यक्रम का मंच संचालन करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कहा कि संस्थान भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। परिवार स्नेह मिलन कार्यक्रम भी भारतीय परम्परा में संयुक्त परिवारों की महत्ता बताना एवं विघटित हो रहे परिवारों पर ध्यान इंगित कराना है। अतिथि परिचय एवं स्वागत दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने किया। सभी अतिथियों का फूल-मालाओं, श्रीफल और शॉल से अभिनंदन किया गया। मंचासीन अतिथियों द्वारा ‘सहज अभिव्यक्ति भाग-3’ पुस्तक का विमोचन किया गया।

पुस्तक के बारे में लेखक एवं हाइकुकार के.बी. व्यास ने बताते हुए स्व. डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा जी को स्मरण किया, जिन्होंने पुस्तक पर अपने बहुमूल्य विचार रखे। हास्य पुराण में लिखा है कि आप हर किसी से समझते रहिए। जिससे आपका विवेक समझदार कहे, उसकी संगत में रहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने शाक्यमुनि बुद्ध, सत्य सुंदर है, धर्म पर, सुख और दुख, संतुष्टि, इस तरह कुल 28 आलेख इस पुस्तक में लिखे हैं। साहित्यकार कमलेश भट्ट ‘कमल’ ने पुस्तक के विषय में कहा कि पुस्तक जीवन जीने की कला है। सुखी रहने का तरीका इस पुस्तक में बताया गया है। यह पुस्तक हमारी चेतना पर असर डालती है।

मुख्य वक्ता श्री नंदलाल जोशी ने परिवार प्रबोधन पर बोलते हुए कहा कि सच्चे अर्थों में सुखी जीवन, सार्थक जीवन, आनंदमय और यशमय जीवन का जितना गहरा चिंतन-मंथन भारत की धरती पर हुआ है वह बहुत अद्भुत है। वर्तमान समय में संयुक्त परिवार तेजी से टूटकर एकल परिवारों में बदल रहे हैं। एकल परिवार आर्थिक रूप से संपन्न होता है, लेकिन इसमें सहनशीलता, परस्पर सहयोग व संस्कारों की कमी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। जिसके कारण परिवार का प्रत्येक सदस्य चिंता से ग्रस्त हो रहा है। हमारी प्राचीन ऋषि-मुनियों की संस्कृति तो हमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की शिक्षा देती है अर्थात पूरी पृथ्वी व इसमें रहने वाले सभी प्राणी, जानवर व वनस्पति परिवार के विभिन्न अंग है एवं इनके साथ मिलजुलकर रहना सिखाती है। कितने आश्चर्य की बात है कि हम पश्चिमी संस्कृति अपना रहे है और अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं जबकि विदेशी हमारे देश व भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षित हो रहे है।

नंदलाल जोशी ने सामाजिक समरस समाज बनाने की महती आवश्यकता बताया। परिवारों में सकारात्मक ऊर्जा एवं उत्साह का वातावरण बनाने के लिए परिवारजनों को मिलकर अपने-अपने ईष्ट की वंदना, जप, कीर्तन आदि करना चाहिए। सभी को एक साथ भोजन करना एवं बच्चों को संस्कारवान शिक्षाएं देना भी परिवार में सकारात्मकता लाता है। मुख्यातिथि अवनीश भटनागर ने कहा कि संस्कृति, शिक्षा, साहित्य और परिवार यह सब एक साथ चलने वाली विधाएं हैं। समाज को शिक्षा के माध्यम से दिशा देने का काम विद्या भारती बखूबी कर रही है। हम जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसमें समाज का विविध प्रकार का जैसे सहयोग मिलता है वही वास्तव में हमारी प्रेरणा का कारण है। उन्होंने चार श्रेणियां विद्यार्थी, विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले शिक्षक, शिक्षा तंत्र की व्यवस्थापना और चौथा उनके अभिभावक का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबसे मिलकर ही समाज बनता है।

परिवार स्नेह मिलन की भूमिका रखते हुए वासुदेव प्रजापति ने कहा कि संतों के चरित्र आप, हम सब जैसे लोगों के दोष रूपी छिद्रों को ढकने का काम करते हैं। ऐसे संतों के चरित्र, उन संतों का संग करना ही वास्तव में सत्संग है। सत्संग की हमारे समाज में अत्यंत महत्ता है। लोक शिक्षा का सशक्त माध्यम सत्संग है। यह सत्संग आनंद और कल्याण का मूल है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी ने कहा कि हमारे अंदर का नैमिषारण्य रस वर्षा करता है। रस जब बहता है तो सारी ग्रंथियों को खोलता है। यहां भी खोला है। भक्ति रस आसक्ति को कृष्ण की ओर ले जाता है। नैमिषारण्य आज वास्तव में रस से सराबोर हुआ है। समापन पर डॉ. रामेन्द्र सिंह ने अतिथिजनों एवं सभागार में उपस्थित सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर डॉ. हुकम सिंह, कृष्ण कुमार भंडारी, हरीश गर्ग, सुरेन्द्र मोहन, बहन पांचजन्य जी, बलबीर जी, ममता सूद, डॉ. संजीव, डॉ. अनुराधा, चेतराम जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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