कांच की बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए…
दीपक कश्यप/न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। छठ पर्व सेवा समिति के तत्त्वाधान में रविवार सायं केडीबी ऑफिस के निकट ब्रह्मसरोवर पर 12वें छठ महोत्सव के उपलक्ष्य में विशाल भजन संध्या एवं अखंड भंडारा दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सायं 5 बजे ब्रह्म सरोवर आरती स्थल पर अस्तगामी सूर्य को अर्ध् एवं आरती से हुआ, इसके पश्चात भंडारा 6 बजे आरंभ हुआ और सांस्कृतिक कार्यक्रम सायं 7 बजे शुरु हुए, जो सोमवार सुबह सूर्य को अर्ध्य देने के पश्चात आरती के साथ संपन्न हुए। सर्वप्रथम आरती स्थल पर समिति के पदाधिकारियों ने अस्तगामी सूर्य को अर्ध्य देकर आरती की।उसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की वेला में कुरुक्षेत्र सांसद व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नायब सिंह सैनी बतौर मुख्यातिथि और थानेसर विधायक सुभाष सुधा अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
दोनों अतिथियों ने इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पूर्व ओएसडी अमरेंद्र सिंह, जिला परिषद् के उपाध्यक्ष डीपी चौधरी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य सूरजभान कटारिया विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यातिथि नायब सैनी ने कहा कि भगवान सूर्य साक्षात प्रत्यक्ष देवता हैं। बिना सूर्य की चमक के दुनिया की कोई ताकत मिल ही नहीं सकती। सूर्य देव की बहन का नाम छठ मैय्या है। इस व्रत के करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पूर्वांचल समाज के लोग जो अब हरियाणा में रह रहे है वे अब हरियाणावासी है। हरियाणा का कलेजा बहुत बडा है जो यहां आया, यहीं का हो गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए विधायक सुभाष सुधा ने आयोजकों को छठ पर्व की बधाई देते हुए कहा कि भोजपुरी भारत की ही नहीं अपितु पूरे विश्व की मीठी व प्रिय भाषा बन चुकी है।
वहीं, विशिष्ट अतिथि सूरजभान कटारिया ने कहा कि छठ वह प्राचीन पर्व है जिसमें राजा और रंक एक घाट पर माथा टेकते हैं, एक देवता को अर्घ देते हैं और एक बराबर आशीर्वाद पाते हैं। धन और पद का लोभ मनुष्य को मनुष्य से दूर करता है, पर धर्म उन्हें साथ लाता है।अपने धर्म के साथ होने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि आप अपने समस्त पुरुखों के आशीर्वाद की छाया में होते हैं। छठ के दिन नाक से माथे तक सिंदूर लगा कर घाट पर बैठी स्त्री अपनी हजारों पीढ़ी की अजियासास ननियासास की छाया में होती है, बल्कि वह उन्ही का स्वरूप होती है। उसके दउरे में केवल फल नहीं होते, समूची प्रकृति होती है। वह एक सामान्य स्त्री सी नहीं, अन्नपूर्णा सी दिखाई देती है।आपको उनमें कौशल्या दिखेंगी, उनमें मैत्रेयी दिखेगी, उनमें सीता दिखेगी, उनमें अनुसुइया दिखेगी, सावित्री दिखेगी… उनमें पद्मावती दिखेगी, उनमें लक्ष्मीबाई दिखेगी, उनमें भारत माता दिखेगी।
धर्मवीर मिर्जापुर ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि उनके छठ पर्व के आँचल में बंध कर ही यह सभ्यता अगले हजारों वर्षों का सफर तय कर लेगी।छठ डूबते सूर्य की आराधना का पर्व है। डूबता सूर्य इतिहास होता है, और कोई भी सभ्यता तभी दीर्घजीवी होती है जब वह अपने इतिहास को पूजे। अपने इतिहास के समस्त योद्धाओं को पूजे और इतिहास में अपने विरुद्ध हुए सारे आक्रमणों और षड्यंत्रों को याद रखे।छठ उगते सूर्य की आराधना का पर्व है। उगता सूर्य भविष्य होता है और यही छठ पूजा का मूलमंत्र है। आयोजक संतोष पासवान और आयोजन मंडल के सभी सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि प्रवासी समाज, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, नेपाल, उत्तराखंड, उड़ीसा व पश्चित बंगाल के निवासी आते हैं, जिनके लिए धर्मशाला की मांग काफी समय से की जाती रही है।अब छठ पर्व पर होने वाली भीड़ की वजह से धर्मशाला की बहुत अधिक आवश्यकता है, इसलिए धर्मशाला का निर्माण किया जाए एवं छठ महापर्व पर राजकीय अवकाश घोषित किया जाए।कार्यक्रम में आयोजकों ने सभी अतिथियों व सहयोगियों पगड़ी व दोशाला पहनाकर स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस दौरान मंच से दानी-सज्जनों की घोषण लगातार होती रही।
भोजपुरी धमाल पर फिदा हुए हरियाणवी
जात बाने कुरुक्षेत्र के बाजार राजा जी…,
मिसरी की डली जइसन ई भोजपुरी बोली लगेला….,
कांच की बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए….,
आइल छठ के बरतिया फंड मंगा देई मुखिया जी….,
पटना के घाट पर देवेले अरधिया हो केकरा लागी….,
अंगना में चौका पुराई देबो बेदिया बनाई देवे हो….,
इत्यादि भोजपुरी लोकगीतों पर श्रद्धालुओं के साथ अतिथि, शहरवासी तथा आयोजक खूब थिरके। भोजपुरी पॉप सॉन्ग और भोजपुरी आर्केस्ट्रा पर अपनी धुआंधार प्रस्तुति देते हुए प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका हैप्पी राय, गायक सुधीर संगम यादव, रणजीत, अजीत माहिया, हास्य कलाकार टुनटुन-ठुनठुन-मुनमुन इत्यादि ने अपने चिर-परिचित अंदाज में सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करके लोगों का दिल जीत लिया। पानीपत और दिल्ली के कलाकारों ने देवी-देवताओं की झांकियां दिखाई।भीड़ इतनी अधिक रही कि पंडाल के सभी पर्दे भी खोलने पड़े। लोगों ने अपने मोबाइल से फोटो खींचे और वीडियो क्लिप भी बनाई।जब कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे थे तो मंच संचालकों ने अपने स्टाइल में कहा कि इको बार सभी भैय्यन से रिक्बेस्ट बा, भैय्या जोरदार ताली तो बजइला.. इस पर पूरा पंडाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम के बीच-बीच में भोजपुरी भाषा में चुटकुले सुनकर लोगों ने हंसी के फव्वारे छोड़े।
अखंड भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने किया भोजन
सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल के साथ ही बने पंडाल में आयोजकों ने विशाल भंडारे का आयोजन किया, जो सात बजे शुरु होकर सुबह तक लगातार चलता रहा। भंडारे में पूड़ी, आलू-छोले की सब्जी, कढ़ी-चावल व हलवा परोसा गया। इस दौरान छठ पर्व समिति के 150 वॉलंटियर्स ने व्यवस्था संभाली।
इन वोलेंटियर्स ने संभाली व्यवस्था
कार्यक्रम को सुचारु रुप से चलाने के लिए छठ पर्व सेवा समिति हरियाणा के पदाधिकारियों में प्रधान संतोष पासवान, उप-प्रधान लाल बहादुर कुशवाहा, दिलीप राय, सचिव सुशील कुमार, राकेश कुमार भारती, रामविलास पासवान, राजकुमार पाल, अर्जुन पासवान, जयचंद पासवान, चंद्रशेखर मैहतो, सुजीत यादव, मुन्ना शाह, राजकुमार टुनटुन ठेकेदार, सुनील ठेकेदार, फेकन ठेकेदार, दक्कन ठेकेदार, गुड्डू ठेकेदार, शिवम पासवान, राहुल राय सहित कैथल, ढांड, तरावडी, अंबाला, हिसार, बराडा, निगदू, कोहण्ड, लाडवा,पूंडरी, पिपली और शाहाबाद इंद्री निसिंग पीपली की शाखाओं के प्रतिनिधियों ने व्यवस्था संभाली।