न्यूज़ डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र । श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के स्वस्थवृत्त विभाग द्वारा गुरुवार को रिसर्च मेथडोलॉजी पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न विषयों जैसे शोध प्रबन्ध का प्रारूप बनाना, सेंपलिंग के तरीके, डाटा एकत्रित करना, उनका विश्लेषण और शोध पत्र कैसे लिखा जाए आदि पर प्रकाश डाला गया। व्याख्यान का शुभारंभ कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान द्वारा भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग अनुसंधान का युग है। शोध के माध्यम से ही अनेकों ज्ञानवर्धक जानकारी हमें उपलब्ध हो रही है। वहीं आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में समयानकुल नवाचार और अनुसंधान बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैसे तो आयुर्वेद का प्रत्यके ग्रंथ प्रमाणिकता पर आधारित है और विज्ञान सम्मत होने के साथ ही सैकड़ों वर्षों से उपयोग में है। मगर विश्व को उसकी ही भाषा यानी वैज्ञानिक भाषा में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से अवगत कराने की जरूरत है। आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना ने कहा कि प्रैक्टिकल कार्यशालाओं से विद्यार्थियों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जिसका अर्थ कि लोगों का एक विशेष समूह किसी विशेष विषय या परियोजना पर गहन चर्चा करता है और चर्चा के माध्यम से ही अनसुलझे सवालों के भी जवाब मिल जाते हैं इसलिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन होते रहना ही चाहिए। दिल्ली के केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनू रानी ने विद्यार्थियों को रिसर्च आर्टिकल कैसे लिखा जाए, सांइटिफिक लेखन और पब्लिकेशन स्कील के बारे में विस्तार से जानकारी दी। स्वस्थवृत्त विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा रानी ने कुलपति महोदय और दिल्ली के केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनू रानी का आभार प्रकट किया और कहा कि इस एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान में एमडी और एमएस के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। जिसमें शोध कार्य के विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा में विद्यार्थियों ने बढ़चढ़ हिस्सा लिया। मंच का संचालन डॉ. मोहित ने किया। इस अवसर पर डॉ. सचिन शर्मा, योगा शिक्षक योगेंद्र कुमार और पीजी स्कॉलर मौजूद रहे।