फिल्म अगर कला है तो हर कला की तरह यह भी सत्यम शिवम सुंदरम पर आधारित होनी चाहिए-डा.मनमोहन वैद्य
गजेंद्र चौहान,अशोक शरण और विघनेश ने मास्टर क्लास में किया संबोधित
अब भारत अपनी सोच में अंगड़ाई ले रहा,सब कुछ बदल रहा है तो फिल्में भी बदल रही हैं-गजेंद्र चौहान
एनडी हिंदुस्तान संवाददाता

पंचकूला। तीन दिवसीय फिल्म फेस्टिवल दिन मास्टर क्लास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह डा.मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत एक विशेष तरह का देश है। जो अध्यात्म पर आधारित है। इसने भारत के व्यक्तित्व को बनाया। हम चराचर श्रृष्टि में चीजों को अलग अलग करके नहीं देखते। भारतीय संस्कृति ने देश की भिन्नता को स्वीकार किया। फिल्म अगर कला है तो हर कला की तरह वह सत्यम शिवम सुंदरम पर आधारित होनी चाहिए। भारत को ठीक से समझेंगे तो अपनी छोटी छोटी फिल्मों में उस भारतीय विचार को भी लेकर आएंगे। भारत अब जाग रहा है और इसको जगाने का प्रभावी माध्यम शार्ट फिल्में और डाक्युमेंट्री है।भारत का उदय शुरु हो गया है,जो अब चलने वाला है।
मास्टर क्लास में महाभारत धारावाहिक युधिष्ठिर फिल्म अभिनेता एवं सुपवा के कुलपति गजेंद्र चौहान ने मास्टर क्लास में कहा कि अब भारत अपनी सोच में अंगड़ाई ले रहा है।सब कुछ बदल रहा है तो फिल्में भी बदल रही हैं। भारत के उदय के लिए महाभारत की तरह लड़ना होगा।नकारात्मक सोच छोड़ कर सकारात्मकता को अपनाना होगा। रामायण और महाभारत धारावाहिक आने के बाद भारत की सोच बदली है,जो देश के हित में है। करीब 200 से ज्यादा जनजातीय फिल्में बनाने वाले झारखंड के फिल्मकार अशोक शरण ने कहा कि जब तक उनमें जान है वह जनजातीय फिल्मों में काम करते रहेंगे।
करीब 30 वर्षों से महिला विषयों पर टीवी धारावाहिक और फिल्में बनाने वालीं मोना सरीन ने बताया कि उनकी नई फिल्म एंटी बुलींग पर आधारित है और सीबीएसई ने इस फिल्म को हर स्कूल में दिखाया है। तमिलनाडु के त्रिचि से आए आईटी इंजीनियर विघनेश ने बताया कि उनकी तमिल फिल्म थुन्नई (साथी) एक वृद्ध व्यक्ति की कहानी है,जिसको एक वृद्धा सहारा देती है।