विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है देश लूटने वालों का इतिहास, देश बचाने वाले हैं लुप्त : स्वामी ज्ञानानंद
बच्चों को पढ़ाया जाए अ से अर्जुन और आ से आर्यभट्ट : गीता मनीषी
जीओ गीता कर रही है गीता पर पाठयक्रम तैयार : गीता मनीषी
गीता सीखाती है जीने की कला : मारकंडेय आहुजा
कुवि संस्थानम के साथ मिलकर करेगा गीता पर शोध कार्य : प्रो. सचदेवा
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र, 19 दिसंबर। गीता ज्ञान संस्थानम् में आयोजित गीता जी की शिक्षा के क्षेत्र में भूमिका पर आयोजित सेमिनार का आयोजन गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी के सानिध्य में किया गया। सेमिनार को संबोधित करते हुए स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि संस्कार बिना शिक्षा होगी तो भविष्य में अनेकों समस्याएं व प्रश्न खडे हो जाएंगें और उनका समाधान केवल गीता में है। गीता मनीषी ने कहा कि गीता सर्वमान्य ग्रंथ है और दुनिया का एकमात्र ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। जीओ गीता का प्रयास है कि स्कूलों के लिए गीता का पाठयक्रम तैयार किया जाए और ऐसी वर्णमाला तैयार हो जिमसें बच्चों को अ से अर्जुन और आ से आर्यभट्ट पढने को मिले।
गीता मनीषी ने कहा कि आज बच्चों को देश लूटने वालों का इतिहास पढाया जा रहा है जबकि देश बचाने वाले लुप्त हैं। नैतिक मूल्यों की बात को लुप्त कर दिया गया है। गीता धर्म और जाति से उपर उठकर कर्म व संस्कार का संदेश देती है और आज हर बच्चे को चाहे वह किसी भी धर्म व जाति का हो संस्कारवान बनाने की जरूरत है। नैतिक मूल्यों पर आधिकतम शिक्षा पद्धति के लिए जीओ गीता द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। स्वामी जी ने बताया कि जीओ गीता के इस प्रयास में अनेक शिक्षाविद सहयोग कर रहे हैं। उन्होने कहा कि मानव की प्रत्येक समस्याओं का समाधान गीता में है। शिक्षा का जो स्वरूप आज देखने को मिल रहा है यदि वह संपूर्ण होता तो अनेक विसंगतिया और समस्याएं नही आनी चाहिए थी। इसलिए मूल्यों पर आधारित शिक्षा बच्चों को दिए जाने की जरूरत है।
सेमिनार को संबोधित करते हुए जीओ गीता के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मारकंडेय आहुजा ने अपने संबोधन में कहा कि गीता ज्ञान संस्थानम् में गीता के हर क्षेत्र में शोध होगा। स्वामी ज्ञानानंद जी का प्रत्येक श्वास गीता को समर्पित है। उन्होने कहा कि निष्काम भाव से कर्म करने का संदेश गीता देती है और जो बच्चे संयम से निष्ठापूर्वक शिक्षा ग्रहण करते हैं वे अधिक सफल होते हैं। गीता बच्चों को जीने की कला सीखाती है। व्यक्ति के दिमाग का बहुत बडा हिस्सा जागृत करने में गीता की अहम भूमिका है। गीता से ही शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाया जा सकता है। शुप्त दिमाग को जगाने में गीता की अहम भूमिका है। आज बच्चों को तैरना सीखाना होगा केवल ज्ञान देने से ही काम नही चलेगा। शिक्षा के क्षेत्र में जो गिरावट आई है उसको गीता की शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है। गीता जिज्ञासा सीखाती है और शिक्षा में जिज्ञासा पैदा किया जाना जरूरी है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्रारंभ से ही गीता ज्ञान संस्थानम् से जुडे हुए हैं। उन्होने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गीता ज्ञान संस्थानम् के साथ मिलकर गीता पर शोध का कार्य करेगा। उन्होने कहा कि क्वालिफिकेशन और एजुकेशन में बहुत फर्क होता है। एजुकेशन में नैतिक मूल्य जोडऩे से शिक्षा पूर्ण होती है। साकारात्मक सोच के बिना सफलता नही मिलती। गीता व्यक्ति के व्यवहार का निर्माण कैसे हो इसका मार्गदर्शन करती है। निराकार ज्ञान है और साकार भी ज्ञान है। व्यक्ति को इच्छा को त्यागकर कर्म करना चाहिए। उन्होने नई शिक्षा नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा में मूल्यों को जोडा जाना बहुत जरूरी है। सेमिनार में गुजवि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति केसी बांगड ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कुवि के रजिस्ट्रार डा. संजीव शर्मा, चौ. देवीलाल विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति डा. राधेश्याम, डा. सुरेंद्र मेाहन मिश्रा, डा. महासिंह पूनिया, कुलजिंद्र मोहन भट्ट, जिला शिक्षा अधिकारी कुरुक्षेत्र अरूण आश्री, बाबू अनंत राम जनता कॉलेज के प्रिंसीपल डा. ऋषिपाल सहित अन्य शिक्षावदों ने भाग लिया।
