सरकार द्वारा गेहूं खरीद पर आढ़तियों का कमीशन 10 रुपए 99 पैसे काम करके 45 रुपए 88 पैसे देने का निर्णय व्यापारी विरोधी फैसला है- बजरंग गर्ग
सरकार आढ़तियों को बर्बाद करने के लिए सरसों, नरमा, चना, सूरजमुखी, मूंग आदि फसलों की सरकारी खरीद आढ़तियों के माध्यम से नहीं कर रही है- बजरंग गर्ग
गेहूं व सरसों खरीद के लिए अनाज मंडियों में सरकार की तरफ से कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है- बजरंग गर्ग
सरकार सरकारी मंडियां बंद करके बड़े-बड़े घरानों को लाभ पहुंचाना चाहती है- बजरंग गर्ग
सरकार अनाज, सब्जी व फलों के व्यापार पर बड़े-बड़े घरानों का कब्जा करवाना चाहती है- बजरंग गर्ग
डा.प्रदीप गोयल/न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व हरियाणा कांन्फैड के पूर्व चेयरमैन बजरंग गर्ग ने कहा कि 1 अप्रैल से मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है मगर सरकार की तरफ से मंडियों में गेहूं व सरसों की खरीद के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। मंडी में किसी प्रकार की मूलभूत सुविधा तक नहीं है। यहां तक की गेहूं का सरकारी एमएसपी 2275 रुपए प्रति क्विंटल है जिसके 2.5 प्रतिशत के हिसाब से आढ़तियों का 56 रुपए 87 पैसे कमीशन बनता है मगर सरकार आढ़तियों का कमिशन 10 रुपए 99 पैसे कम करके 45 रुपए 88 पैसे देने का आदेश जारी किया है। इसी प्रकार सरकार ने धान का भी कमीशन आढ़तियों का कम किया है।
आढ़तियों का कमीशन कम करने से व्यापारियों में सरकार के प्रति बड़ा भारी रोष है जबकि अनेकों सालों से हर अनाज की खरीद मंडियों के आढ़तियों के माध्यम से होती आ रही है और 2.5 प्रतिशत पूरा कमीशन सरकार की तरफ से मिलता था। बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार ने सरसों, सूरजमुखी, चना, बाजरा, मूंग आदि फसलों की सरकारी खरीद आढ़तियों के माध्यम से ना करने से आढ़ती, किसान व मजदूरों में बड़ी भारी नाराजगी है। सरकार को हर अनाज की खरीद मंडी के आढ़तियों के माध्यम से करके आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत पूरी दामी देनी चाहिए। सरकार बड़े-बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अनाज मंडियां बंद करने पर तुली हुई है। सरकार अनाज, सब्जी व फलों के व्यापार पर बड़े-बड़े घरानों का कब्जा करवाना चाहती है अगर ऐसा हो गया तो अनाज, सब्जी व फलों के दाम पहले से दो-तीन गुना देश में ओर बढ़ जाएंगे।
गर्ग ने कहा कि बड़े-बड़े घराने पूरे देश में वेयरहाउस व साइलो बना कर अनाज का भंडारण करना चाहते है। सरकार अनाज की ख़रीद आढ़तियों के माध्यम से ना करके प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से या खुद सीधा करना चाहती है जो सरासर गलत है। अनाज मंडियों में 40 हजार आढ़ती, हजारों गांव में भर्ती करने वाले, लाखों मजदूर, मुनीम, ट्रांसपोर्टर आदि को सीधे तौर पर रोजगार मिल रहा है। अगर सरकार अनाज खरीद आढ़तियों के माध्यम से नहीं करेगी तो लाखों लोग बर्बाद हो जाएंगे। भाजपा सरकार पूरी तरह से आढ़ती, किसान व मजदूर विरोधी सरकार है। यह सरकार आढ़ती किसान व मजदूरों को बर्बाद करने पर तुली हुई है मगर ऐसा किसी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।