एनडी हिंदुस्तान संवाददाता
चंडीगढ़। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने जींद के उपायुक्त को निर्देश देते हुए कहा है कि समयपर निशानदेही (डिमार्केशन) न करने पर संबंधित कानूनगो पर लगाए गए जुर्माना को उनके वेतन से काटा जाए और राज्य सरकार के ख़ज़ाने में जमा करवा कर आयोग को रसीद सहित सूचित किया जाए।इस संबंध में हरियाणा राज्य सेवा का अधिकार आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि आयोग नरवाना के एसडी ओसिविल अनिल दून द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट और आवेदकों को समय पर निशानदेही (डिमार्केशन) न करने कोलेकर भी नाखुश था। इस बारे में आयोग ने एसडीओ को निर्देश दिए है कि शेष 18 निशानदेही के मामलों मेंसंबधित कानूनगो का स्पष्टीकरण लें और उनके उत्तर सहित अपनी अनुशंसा आगामी 31 मई, 2024 तक सौंपे।
प्रवक्ता ने बताया कि अधिसूचित सेवा के तहत अपीलकर्ता ने भूमि पर फसल नहीं खड़ी होने पर निशानदेही करवाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन निर्धारित समय सीमा में जब अपीलकर्ता की निशादेही नहीं हुई तो उन्होंने ईमेल के माध्यम से आयोग को अपील की। जब आयोग के संज्ञान में यह मामला आया तो इस मामले परतत्काल जांच करवाई और दोषियों पर कार्यवाही की गई।
इसी प्रकार, नोटिफाई सेवा के अंतर्गत विनोद, कानूनगो 6000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है जो उसके वेतन सेकाटकर राज्य सरकार के खजाने में जमा करवाया जाएगा। यह जुर्माना दो मामलों में देरी होने पर लगाया गया है,जिसके तहत प्रति मामले में 3000 रुपए की राशि ली जाएगी।अन्य मामलों में सभी तथ्यों की जानकारी और जवाब आने के पश्चात सुनील और अनूप कानूनगो के मामलों कोफाइल कर दिया गया है, परंतु भविष्य में समय पर नोटिफाई सेवा को देने के लिए चेतावनी भी दी गई है। इसके अलावा, एक अन्य मामले में सुनील कानूनगो, दाखल पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है जिसके तहत सुनील कानूनगो ने 101 दिन का समय सेवा को देने के लिए ले लिया था।
कुछ अन्य मामलों में सुनील, कानूनगो, दाखल ने देरी करने पर 9000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसीप्रकार, नरवाना के तहसीलदार ने अधूरी जानकारी दी है और उसे जानकारी को 19 अप्रैल 2024 तक उपलब्ध करवाने के निर्देश आयोग द्वारा दिए गए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा सेवा अधिकार आयोग 45 विभागों की 657 सेवाओं को अधिसूचित किया हुआ है।यदि कोई भी विभाग अधिसूचित सेवाओं का लाभ तय समय सीमा में नहीं दे रहा है। तो इसकी शिकायत लगाने केबाद प्रार्थी की शिकायत पर संबंधित विभाग की ओर से तय समय सीमा के अंदर-अंदर समाधान करना होता है।इसके अलावा, जिन शिकायतों पर कार्यवाही नहीं की गई है, वे निर्धारित समय के पश्चात प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी अथवा द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी के समक्ष ही समाधान हेतु पहुंच जाती हैं।