Home Kurukshetra News प्रेरणा वृद्धाश्रम में कविताओं के माध्यम से बुजुर्गों को जवानी के दिन याद करवाए गए

प्रेरणा वृद्धाश्रम में कविताओं के माध्यम से बुजुर्गों को जवानी के दिन याद करवाए गए

by ND HINDUSTAN
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प्रेरणा वृद्धाश्रम में आयोजित किया गया कवि सम्मेलन

कवियों ने बुजुर्गों के साथ सांझा की दिल को छू लेने वाली भावनाएं

न्यूज डेक्स संवाददाता


कुरुक्षेत्र, 27 दिसंबर। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में अपनों से ठुकराए तथा दुत्कारे गए बुजुर्गों को आश्रय देने वाले नगर के प्रमुख प्रेरणा वृद्धाश्रम में नव वर्ष के आगमन से पूर्व एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन में अपनी रचनाओं के माध्यम से कवियों ने बुजुर्गों के साथ दिल को छू लेने वाली भावनाएं सांझा की। इस कवि सम्मेलन में रतन चंद सरदाना, डा. वी डी शर्मा, शकुंतला शर्मा, वीरेंद्र राठौर, गायत्री कौशल, डा. सी डी एस कौशल, मधु मल्होत्रा, अनीता रामपाल, सुरभि काठपाल, एसके मित्तल, कविता रोहिल्ला इत्यादि कवियों ने अपनी मार्मिक कविताओं की प्रस्तुति दी। आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग देव ऋषि ने बेहतरी से मंच संचालन किया।

नवोदित कवि वीरेंद्र राठौर ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा डा. वी डी शर्मा ने अध्यक्षता की। यह कवि सम्मेलन सार्थक साहित्य मंच एवं प्रेरणा कला व साहित्य मंच के संयुक्त तत्वाधान में प्रेरणा संस्था के संस्थापक जय भगवान सिंगला के मार्गदर्शन में संस्था सदस्यों तथा बुजुगों की मेजबानी में आयोजित किया गया। इस कवि सम्मेलन में सभी कवियों ने एक से एक सुंदर प्रस्तुति दी। कवि रतन चंद सरदाना ने सबको महारानी लक्ष्मी बाई के बलिदान की याद करवाई और उनके साहस को बड़े सुंदर शब्दों में प्रस्तुत किया। डा. बी डी शर्मा ने जहां आज के सामाजिक वातावरण के बारे में कविता के माध्यम से विचार रखें। उसके साथ-साथ उन्होंने भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की याद में कविता सुनाई। नवोदित कवियत्री मधु मल्होत्रा ने अपने जीवन में पहली बार कविता लिखी और उसकी प्रस्तुति दी।

उन्होंने बचपन से लेकर अब तक के अपने जीवन का बहुत ही सुंदर ढंग से मार्मिक शब्दों में उल्लेख किया। विद्वान शकुंतला शर्मा ने हरियाणवी संस्कृति को प्रदर्शित करती एक बहुत ही मनमोहक रागिनी पेश की। सभी बुजुर्गों ने उनका साथ दिया। संस्था के संस्थापक जय भगवान सिंगला की ओर से भी बुजुर्गों का उत्साहवर्धन करने के लिए तथा उन्हें मुख्यधारा में रहने की बात अपने तरीके से कही। उन्होंने अपने  बिंदास अंदाज में विचार अपनी रचना रखे। उन्होंने अपनी रचना में मुख्य रूप से आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को कहा कि वह यह बात कभी ना सोचें कि वे बुजुर्ग हो गए हैं। उन्हें हमेशा अपने आपको पहले जैसी स्थिति में रखकर अपना जीवन उत्साह और उमंग के साथ बिताना चाहिए। उनकी कविता के बोल इस प्रकार थे :-

आओ मेरे दोस्तों महफिल जमाएं  
हो गए हैं अब हम 60 से ऊपर
थोड़ी देर यह भूल कर
अपने जवानी के दिनों में खो जाएँ

कवि सम्मेलन संचालन कर रहे वीरेंद्र राठौर ने बहुत ही मनमोहक प्रस्तुतियां दी। आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिला कौशल और उर्मिल माताजी ने भजनों द्वारा सब को आनंदित किया। कवि सम्मेलन प्रारम्भ होने से पहले सभी ने नवनिर्मित मंदिर में जाकर प्रभु की आराधना की तथा परमात्मा का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही वृद्धाश्रम में बने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित करके भारत माता के महान बलिदानी सपूतों को नमन किया। कवि सम्मेलन के शुभारम्भ अवसर पर सरस्वती वंदना कर सरस्वती माता के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए। उल्लेखनीय है कि प्रेरणा वृद्धाश्रम में समय-समय पर अनेकों कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा सभी तीज त्योहार मनाए जाते हैं।

इसी श्रेणी में बुजुर्गों के लिए यह कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के पश्चात सभी ने भोजन ग्रहण किया एवं बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। कवि सम्मेलन की एक और विशेषता रही की कि प्रेरणा कला एवं साहित्य मंच के संरक्षक जय भगवान सिंगला द्वारा रचित उसके नई पुस्तक “दैवीय चमत्कार -मैं और मेरा परिवार” की प्रतियां सभी उपस्थित जनों को वितरित की गई। इस कवि सम्मेलन में जय भगवान सिंगला के निर्देशानुसार कोरोना महामारी के चलते बचाव के लिए कोविड 19 के सभी निर्देशों का पालन किया गया।

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