Home haryana ओलंपियन पद्मश्री योगेश्वर दत्त के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती के गुर सीखने गुरुकुल पहुंचे कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी

ओलंपियन पद्मश्री योगेश्वर दत्त के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती के गुर सीखने गुरुकुल पहुंचे कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी

by ND HINDUSTAN
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा-प्राकृतिक खेती  से ही बचेंगे जल, जंगल, जमीन और जीव

रासायनिक खेती से घट रहा है भूमिगत जलस्तर और भूमि हो रही है बंजरःराज्यपाल आचार्य देवव्रत

एनडी हिंदुस्तान संवाददाता/ हेमंत राणा

कुरुक्षेत्र। गुजरात के राज्यपाल और देशविदेश में प्राकृतिक खेती मुहिम के प्रबल प्रचारक आचार्य श्देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिकखेती आज की जरूरत है क्योंकि प्राकृतिक खेती करके ही जलजंगलजमीन और जीव को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा किलगातार रासायनिक खेती करने से देश के कई प्रदेशों में जहां भूमिगत जलस्तर लगातार घटता जा रहा है वहीं जमीन भी बंजर हो रहीहै। राज्यपाल आज गुरुकुल कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय पहलवान पद्मश्री योगेश्वर दत्त के नेतृत्व में गुरुकुल में पहुंचे 70  लोगों के प्रतिनिधिमंडल को संबोधित कर रहे है जिसमें 23 नामचीन खिलाडियों के अलावा विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि और किसानबंधु शामिल रहे। 

खिलाडियों में ओलम्पिक मेडलिस्टद्रोणाचार्य अवार्डीध्यानचंद अवार्डीअर्जुन अवार्डीभारत केसरीहिन्द केसरीएशियन औरराष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता भी शामिल रहे। गुरुकुल पहुंचने पर राज्यपाल के ओएसडी डॉराजेन्द्र विद्यालंकार  प्रधानराजकुमार गर्ग ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विख्यात समाजसेवी डॉसम्पूर्ण सिंहनिदेशक बिग्रेडियर डॉप्रवीण कुमारविख्यात कृषि वैज्ञानिक पदम्श्री डॉहरिओमप्राचार्य सूबे प्रतापरामनिवास आर्य भी मौजूद रहे। 

आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती में एक देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से 30 एकड़ भूमि पर खेती की जाती है और किसानको किसी भी प्रकार का कोई पेस्टीसाइडयूरियाडीएपी आदि खेत में डालने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने स्पष्ट किया कि कईलोगों को भ्रम है कि प्राकृतिक खेती और जैविक खेती एक ही है मगर ये दोनों एकदूसरे के बिल्कुल विपरीत है। 

जैविक खेती तो रासायनिक खेती से भी नुकसानदायक है। गुरुकुल के फार्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां पर पिछले 10 वर्षों से विशुद्ध प्राकृतिक खेती की जा रही हैएक बूंद भी यूरिया या किसी प्रकार का पेस्टीसाइड खेतों में नहीं डाला गया। देशी गायके गोबर से बने जीवामृत और घनजीवामृत के प्रयोग से ही फसलों का उत्पादन रासायनिक और जैविक खेती करने वाले किसानों कीतुलना में डेढ़ गुणा से भी अधिक है। 

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में उनके नेतृत्व में 3 लाख से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनायाइसी प्रकार गुजरातमें 10 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर बिना खादकेमिकल के अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। आचार्य ने कहा कि यदि हमें कैंसरहार्टअटैक जैसी बीमारियों से छुटकारा पाना है और आने वाली पीढ़ी को विरासत के रूप में पानी और शुद्ध पर्यावरण देना है तो सभी कोप्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगाइसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। 

इस दौरान आचार्य ने सभी अतिथियों को गुरुकुल की अत्याधुनिक गोशालाएनडीए विंगविद्यालय भवन सहित विभिन्न प्रकल्पों काभ्रमण कराया। उन्होंने जीवामृत एवं घनजीवामृत निर्माण केन्द्र पर अतिथियों को प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले विभिन्न घटकोंकी विस्तृत जानकारी दी। तत्पश्चात अतिथियों का काफिला गुरुकुल के फार्म पर पहुंचा। 

यहां आचार्य ने अतिथियों को उस भूमि के बारे में बताया जिसे कृषि वैज्ञानिकों ने बंजर घोषित कर दिया था मगर जीवामृत घनजीवामृत के प्रयोग से आज उसमें फसलें लहलहा रही हैं। आचार्य ने कहा कि बंजर भूमि को पुनः उपजाऊ बनाने का यह करिश्माकेवल प्राकृतिक खेती में है। फार्म पर एक साथ कई फसलें लेने का मॉडल अतिथियों को बहुत भायासेबकेलाअमरूदलीचीऔर आम के बाग को देख सभी आश्चर्यचकित हुए। अंत में गुरुकुल कुरुक्षेत्र की ओर से आचार्यश्री ने पधारे हुए सभी महानुभावों कोस्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया।

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