Home Kurukshetra News वर्तमान शैक्षणिक चुनौतियाँ एवं समाधान पर आचार्य दक्षता वर्ग में चिंतन

वर्तमान शैक्षणिक चुनौतियाँ एवं समाधान पर आचार्य दक्षता वर्ग में चिंतन

by ND HINDUSTAN
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प्रतिमास आयोजित होने वाले इस दक्षता वर्ग का  उद्देश्य आचार्यों को आधुनिक शिक्षण विधियों, कक्षा प्रबंधन एवं शैक्षिक मनोविज्ञान में प्रशिक्षित करना रहा।

न्यूज़ डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र ।गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में आज दिनांक 10 अगस्त 2024 को आचार्य दक्ष वर्ग का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय के आदरणीय प्राचार्य श्री नारायण सिंह जी ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। तत्पश्चात योग सत्र में आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था के प्रशिक्षक श्री विवेक जी और श्री हर्ष जी ने मानसिक स्वास्थ्य एवं सुदर्शन क्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आचार्यों को तनाव मुक्त रहने की शिक्षा दी। बौद्धिक सत्र का प्रारंभ अंग्रेजी आचार्या श्रीमती सोनिया शर्मा जी ने सामर्थ्य झोंक दो फिर देखो शीर्षक कविता के माध्यम से किया, इसके पश्चात विद्यालय के प्राचार्य श्री नारायण सिंह जी ने विद्या भारती के लक्ष्य, आधारभूत  विषयों,विद्या भारती की  कार्यप्रणाली और विद्यालय दिनचर्या विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में किस प्रकार लाभकारी है, इस पहलू से अवगत कराया। उन्होंने आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को वर्तमान चुनौतियों से तैयार करने के लिए हमें उनका शारीरिक, प्राणिक, मानसिक , बौद्धिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विकास करना होगा। तृतीय सत्र में श्रीमती नैंसी जी एवं विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य श्री सतीश गुप्ता जी ने समता एवं खेल करवाए। कक्षा कक्ष में आचार्य के समक्ष आने वाली विभिन्न समस्याओं को एक लघु नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात आचार्यों को इन समस्याओं के समाधान हेतु चर्चा के लिए छह अलग-अलग समूहों में बाँट दिया गया।   आत्म केंद्रित बालक, अध्ययन का बोझ, मानसिक स्वास्थ्य, अभिभावकों की अपने बालकों से  अति अपेक्षाएँ, जड़ता,हटता, आलस्य, आदि विषयों पर चिंतन किया गया। इसके बाद गट प्रमुखों द्वारा अपने-अपने सुझाव साँझा किए गए। गणित आचार्य श्री धीरज जी ने कहानी के माध्यम से निरंतर काम करने की प्रेरणा दी। अंत में समीक्षा सत्र में विद्यालय के प्राचार्य जी ने आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि कक्षा -कक्षा के वातावरण को आचार्य अपनी कल्पना से सहज और आकर्षक बना सकता है। उन्होंने कहा कि हम सभी को  विद्यार्थियों की क्षमताओं और स्तर को समझते हुए निरंतर अपना कार्य करना चाहिए।

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