Home Karnal news औषधीय उत्पादों की देशभर में डिमांड बहुत अधिक…मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं: प्रो सुरेश मल्होत्रा

औषधीय उत्पादों की देशभर में डिमांड बहुत अधिक…मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं: प्रो सुरेश मल्होत्रा

by ND HINDUSTAN
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औषधीय पौधों की खेती से किसानों का जीवन होगा खुशहाल: प्रो सुरेश मल्होत्रा  

एनडी हिन्दुस्तान

करनाल । स्वास्थ्य लाभ ओर आर्थिक समुद्धि के लिए अश्वगंधा की खेती के प्रति विशेषतौर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति की जागरूकता के लिए महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल में अश्वगंधा के औषधीय गुणों तथा इसकी खेती के फायदों के प्रति जागरूकता बढ़ाने को लेकर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला रविवार को संपन्न हो गई। राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन एमएचयू के माननीय कुलपति प्रो सुरेश मल्होत्रा ने विशेष तौर पर शिरकत की। कार्यशाला में काफी संख्या में महिला किसानों ओर युवाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।

मुख्य अतिथि माननीय कुलपति प्रो सुरेश ने कार्यशाला में आए प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशाला करने का मुख्य उदेश्य औषधीय पौधों के उत्पादन एवं प्रयोग के बारे में जागरूक करना है, जिससे सीधे तौर पर किसानों को फायदा पहुंचे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में औषधीय पौधों का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है साथ ही खपत भी ज्यादा हो रही है। लेकिन किसान खपत के अनुरूप औषधीय पौधों का उत्पादन नहीं कर पा रहे है। औषधीय पौधों से बहुत सारे आयुर्वेदिक उत्पाद बन रहे है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत कारगर है। औषधीय पौधों के बारे में पूरी जानकारी किसानों को हो, इसके लिए इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की खेती बढ़ेंगी, तभी तो औषधीय  उत्पाद बनाने वाली दवा कंपनियों व फैक्ट्रियों के पास कच्चा माल पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि आज औषधीय खेती करके किसान परपंरागत फसलों के मुकाबले बहुत अधिक लाभ कमा सकते है।उन्होंने कार्यशाला में आए किसानों को बधाई देते हुए कहा कि ये कार्यशाला उनके लिए काफी लाभदायक साबित होगी। आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र से आए आयुर्वेद विशेषज्ञ डा. नेहा कौशल ने अश्वगंधा के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आयुर्वेदिक उत्पादों का प्रयोग सही प्रकार से करना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ महा सिंह ने किसानों को बताया कि समय पर अश्वगंधा की खेती की करनी चाहिए, इसके लिए क्या-क्या जरुरी होता है।

एमएचयू की भूमिका और तकनीक विस्तार में योगदान के विजन से किसानों का उत्साह बढ़ाया

कार्यक्रम की संयोजिका डॉ विमला सिंह ने अश्वगंधा की खेती  के लिए उन्नत किस्मों और बीज तथा पौध की आपूर्ति के लिए महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा मिल कर तकनीक विस्तार पर अपने व्याख्यान में चर्चा की तथा बीज की शुध्दता पर संभावित शोध से अवगत कराया। मिशन 2047 के लिए अश्वगंधा की खेती के नए आयामो पर सत्र में चर्चा में उन्होंने बीज और पौध पर बड़े स्तर पर एमएचयू की भूमिका और तकनीक विस्तार में योगदान के विजन से किसानों का उत्साह बढ़ाया। छात्र कल्याण निदेशक प्रो रंजना गुप्ता ने कार्यशाला में आए मुख्य अतिथि, विषय विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों ओर किसानों का धन्यवाद किया। मंच संचालन डॉ विजय अरोड़ा ने किया। 

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