गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कुरुक्षेत्र की अष्टïकोसी तीर्थ यात्रा का किया शुभारंभ
संतों के सानिध्य में कुरुक्षेत्र व आस-पास के जिलों के 200 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने की अष्टïकोसी यात्रा
केडीबी, सरस्वती बोर्ड व संस्थाओं के प्रयासों से फिर शुरू हुई तीर्थ यात्रा
पवित्र ग्रंथ गीता के 11वें अध्याय में उल्लेख है यात्रा का
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र । गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्व प्रसिद्घ धर्मक्षेत्र है। इस कुरुक्षेत्र धाम के चप्पे-चप्पे पर ऐतिहासिक, पौराणिक तीर्थ विराजमान है। इस पावन धरा के कण-कण में पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश सम्माहित है। इसलिए कुरुक्षेत्र तीर्थों की अष्टïकोसी यात्रा एक पवित्र और ऐतिहासिक यात्रा मानी जाती है। इस अष्टïकोसी तीर्थ यात्रा का वर्णन पवित्र ग्रंथ गीता के 11वें अध्याय मेंं भी किया गया है।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज शुक्रवार को गांव बाहरी के नाभिकमल मंदिर में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इससे पहले नाभिकमल मंदिर में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, परमहंस ज्ञानेश्वर महाराज, महंत राम अवतार, महंत विशालदास सहित अन्य संतजनों ने अष्टïकोसी तीर्थ यात्रा के शुभारंभ अवसर पर पूजा अर्चना की और विधिवत रूप से कुरुक्षेत्र की अष्टïकोसी यात्रा का शुभारंभ किया। इस यात्रा में इस्कॉन व जीयो गीता की तरफ से भक्तजनों ने भजन कीर्तन किए और भजन कीर्तन कर पूरी यात्रा को भक्तिरस में भर दिया।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से कुरुक्षेत्र की पौराणिक अष्टïकोसी यात्रा को शुरू करवाकर देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों को एक अनोखी सौगात देने का काम किया है। इस अष्टïकोसी यात्रा को बेहद पवित्र यात्रा माना जाता है और यह यात्रा कुरुक्षेत्र की पावन धरा से बहने वाली पवित्र सरस्वती नदी के किनारे से होकर गुजरती है। इस नदी के किनारे ही पुराणों, वेदों की रचना की गई और पूरे विश्व को ज्ञान, शिक्षा और संस्कार दिए गए। इस यात्रा को ज्ञान,शिक्षा और संस्कारों से जोडक़र देखा जा रहा है। इस यात्रा से लोगों और श्रद्घालुओं को पुण्य की प्राप्ति होगी।