कुरुक्षेत्र प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को करना चाहिए कुरुक्षेत्र धाम की जय का उच्चारण
नव संवत नव वर्ष का कार्यक्रम ब्रह्मसरोवर पर, गीता ज्ञानम संस्थानम से सैकड़ों लोग भजन करते हुए पहुंचेंगे ब्रह्मसरोवर पर
ब्रह्मसरोवर पर गीता पाठ,महाआरती में करेंगे शिरकत
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र । गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि नव सम्वत सनातन स्वाभिमान जैसे पौराणिक कार्यक्रमों से कुरुक्षेत्र को एक धाम के रूप में भी पहचान मिलेगी। इस गीता स्थली को कुरुक्षेत्र धाम की पहचान दिलवाने के लिए हर नागरिक के योगदान की जरूरत होगी। इस धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की सीमा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को कुरुक्षेत्र धाम की जय हो का उच्चारण करने का प्रयास करना चाहिए। इन तमाम प्रयासों से ही कुरुक्षेत्र को एक धाम के रूप में विकसित करना चाहिए।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद शनिवार को गीता ज्ञान संस्थानम केंद्र के वैलनेस हैल्थ सेंटर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में पहली बार सामूहिक रूप से नव सम्वत नव वर्ष के रूप में 30 मार्च को सायं 5:30 बजे ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 100 से ज्यादा धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम में सबसे पहले गीता ज्ञानम संस्थानम केन्द्र में जीयो गीता और धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के लोग पहुंचेंगे और यहां से ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग मेंं कीर्तन करते हुए पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रह्मसरोवर पर सैंकडोंं लोग मिलकर पवित्र ग्रंथ गीता का पाठ करेंंगे और महाआरती में शिरकत करेंगे। इस कार्यक्रम के साथ भजन कीर्तन का भी श्रद्घालु आनंद ले पाएंगे। इस कार्यक्रम की समाप्ति के बाद नागरिकों और श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विश्व भर में कैलेंडर और परम्परा के अनुसार 1जनवरी को ही नया साल मनाया जाता है। लेकिन भारतीय संस्कृति का नव वर्ष नव सम्वत को ही मनाया जाता है। इस देश में नव सम्वत को नव वर्ष के रूप में मनाने के प्राकृतिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी है। इसलिए भारतीय संस्कृति के अनुसार नव सम्वत को नव वर्ष के रूप मेंं मनाना चाहिए। इस सनातन परम्परा को गीता स्थली कुरुक्षेत्र की पावन धरा से फिर से आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैदिक सनातन परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति को अपना योगदान देना होगा। इसलिए सभी सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बार-बार अनुरोध किया गया है कि इस कार्यक्रम में जरूर शिरकत करें। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समाजसेवी जितेन्द्र ढ़ीगडा को संयोजक बनाया गया है और 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा भी अहम भूमिका अदा करेंगे।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 की तैयारियां 6 माह पहले ही शुरू कर दी जाएगी और देश के हर एयरपोर्ट पर गीता जयंती की प्रचार-प्रसार सामग्री को स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा भारत में विभिन्न देशों के राजदूत कार्यालयों और विदेशों में भारतीय राजदूत कार्यालयों में इस प्रकार की प्रचार-प्रसार सामग्री को लगाया जाएगा ताकि गीता महोत्सव का प्रचार हर जनमानस तक पहुंच सके। एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि अष्टïकोसी यात्रा का एक नया अध्याय कुरुक्षेत्र के साथ जोड़ा गया है। इस प्राचीन यात्रा को फिर से शुरू किया गया है और इसके सार्थक परिणाम भी सामने आएंगे।
उन्होंने कहा कि जियो गीता संस्थानम के परिसर में मंदिर, संग्रहालय, गुरुकुल के साथ-साथ अब जियो वैलनेस सेंटर व आचार्य मनीष के सहयोग से अब आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया गया है। इस वैलनेस सेंटर को मेदांता के सहयोग से चलाया जा रहा है और इसमें शुरुआती दौर में सभी प्रकार के टेस्ट नि:शुल्क रखें गए है और अच्छे चिकित्सा द्वारा ओपीडी की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक इलाज के दौरान कैंसर और रसोली जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों का इलाज किया गया है और लोगों को गीता स्थली पर देश की प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इस दौरान आचार्य मनीष ने कुछ व्यावहारिक ज्ञान भी सबके समक्ष रखा और मरीजों ने भी अपने विचार रखें। इस मौके पर चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, समाजसेवी जितेन्द्र ढ़ीगडा, कथावाचक राजेन्द्र पराशर, आचार्य मनीष, केडीबी सदस्य विजय नरुला सहित अन्य गणमान्य लोग और चिकित्सक मौजूद थे।