ऑनलाइन व्याख्यान में हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने में आने वाली जटिलताओं पर प्रकाश डाला गया
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ़ साइंस एंड टेक्नॉलॉजी इन इंडिया (एसपीएसटीआई) ने एविएशन सेफ्टी और दुर्घटना जांच में आधुनिक तकनीक के उपयोग विषय पर एक विशेष ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया। कार्यक्रम को स्टड्स एक्सेसरीज़ लिमिटेड फरीदाबाद ने प्रायोजित किया, जबकि पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी सहयोग दिया। व्याख्यान का संचालन एचएस खोला, पूर्व महानिदेशक नागर विमानन महानिदेशालय भारत सरकार ने किया और कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एससी शर्मा पूर्व अध्यक्ष एवं प्रोफेसर, एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग विभाग पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ने की। खोला ने एविएशन रेगुलेटर्स की भूमिका और हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने में आने वाली जटिलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आंकड़ों के आधार पर बताया कि लगभग 60 प्रतिशत हादसे लैंडिंग और अप्रोच के दौरान होते हैं, जिन का मुख्य कारण मानवीय भूल और खराब मौसम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें से अधिकांश हादसों को बेहतर प्रशिक्षण और नियमों के पालन से टाला जा सकता है। उन्होंने एयर इंडिया कनीष्क (1985) और एम्परर अशोक (1978) जैसे मामलों का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर दुर्घटना जांच में सबसे महत्वपूर्ण सबूत साबित होते हैं। खोला ने बताया कि मेटलर्जिकल जांच, मेडिकल साइंस और डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर डाटा के संयुक्त विश्लेषण से हादसों के सही कारणों का पता लगाया जाता है। अपने व्याख्यान के अंत में खोला ने वैश्विक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज हवाई यात्रा सबसे सुरक्षित परिवहन साधन है, जो सड़क यात्रा से लगभग 270 गुना अधिक सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के कारण पिछले 40 वर्षों में विमान दुर्घटनाओं में 80 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसका संचालन ग्रुप कैप्टन ऑरबिंदो हांडा पूर्व डीजी एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो भारत सरकार ने किया। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के सम्मान व धरम वीर अध्यक्ष एसपीएसटीआई के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।