एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूआईईटी संस्थान में कुलपति प्रोफ़ेसर सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन व अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के दिशा निर्देश में चल रहे छात्र प्रेरक कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को डॉ. बी आर अम्बेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने भारत की गौरवशाली परंपरा वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में भारत के युवाओं की भूमिका विषय पर अपना व्याख्यान दिया।
डॉ. प्रीतम सिंह ने विद्यार्थियों को भारत की गौरवशाली परंपरा से अवगत कराते हुए कहा कि भारत अपनी प्राचीनतम संस्कृत भाषा पर गर्व महसूस करता है क्योंकि संस्कृत भाषा में विज्ञान और तकनीक के वो सभी अनुसंधान उपलब्ध थे जिनका इस्तेमाल कर अंग्रेजों ने आज अपना प्रभुत्व स्थापित किया है उन्होंने भारतीयता की मूल अवधारणा से अवगत कराते हुए बताया कि आर्यभट्ट के जीरो से लेकर नौ तक गिनती के आविष्कार, ज्योतिष विज्ञान हस्तरेखा, मस्तिष्क रेखा में वराहमिहिर के योगदान की चर्चा की। डॉ. प्रीतम ने परमाणु पर ऋषि क़णांक, विद्युत में ऋषि अगस्त, हवाई जहाज़ के निर्माण में ऋषि भारद्वाज की, गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त में आचार्य भास्कराचार्य के योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वाधीन और स्वतंत्र में बहुत अन्तर है अब इस समय भी हम कई ऐसी वस्तुओं के अधीन हैं जो हमें स्वतंत्र होने पर प्रश्नचिन्ह लगाती है इसलिए युवा विद्यार्थियों को हमारे पाँच मूल मंत्र पर कार्य करना होगा इसमें इसको सबको समान समझना, देश के विज्ञान विकास में योगदान देना है, परिवार की संरचना को समझना है, पर्यावरण और जल जलवायु भूमि समस्या को दूर करना है, नागरिक़ कर्तव्यो को निभाना है।
डीन इंजीनियरिंग एवं टैक्नोलॉजी और यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा कि आज के वक्तव्य से विद्यार्थियों को उन सब तथ्यों की जानकारी मिली है जो इतिहास के पन्नों पर अंग्रेज़ी हुकूमत ने अपने फ़ायदे के लिए मिटा दिया है। भारतीयता हमारी पहचान है और हमें भारतीयता के लिए सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार होना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजिका डॉ. सविता गिल, सह-संयोजिका डॉ. दीप्ती चौधरी, डॉ. राजेश अग्निहोत्री, डॉ. सुनील ढींगरा, हरिकेश पपोसा सहित विद्यार्थी मौजूद रहे।