एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र में सी.बी.एस.ई. द्वारा आचार्यों के प्रशिक्षण हेतु “एक्टिव लर्निंग” विषय पर आज एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में विद्यार्थियों के सक्रिय अधिगम (एक्टिव लर्निंग) के प्रति रुचि एवं सहभागिता को प्रोत्साहित करने की रणनीतियों का विकास करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। इस अवसर पर आचार्यों को प्रशिक्षित करने हेतु पूजा ककड़ (विभाग प्रमुख, विज्ञान, महाराणा प्रताप स्कूल, कुरुक्षेत्र) एवं मीनाक्षी मलिक (भाषा शिक्षक, महाराणा प्रताप स्कूल, कुरुक्षेत्र) उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में मीनाक्षी मलिक ने एक्टिव लर्निंग के व्यावहारिक पक्ष पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सोचने, तर्क करने और निष्कर्ष निकालने की दिशा में प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि शिक्षक यदि विद्यार्थियों को स्वयं खोजने और अपनी गलतियों से सीखने का अवसर दें, तो वे आजीवन सीखने वाले बन सकते हैं। मीनाक्षी मलिक ने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे कक्षा में नवीन शिक्षण तकनीकों का प्रयोग करें और विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर शिक्षण प्रक्रिया का संचालन करें। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में श्रीमती पूजा ककड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि एक्टिव लर्निंग का अर्थ केवल शिक्षक द्वारा पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को जीवंत बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि जब विद्यार्थी प्रश्न पूछते हैं, चर्चा करते हैं, समूह में कार्य करते हैं और स्वयं ज्ञान की खोज करते हैं, तभी वास्तविक शिक्षा प्राप्त होती है। उन्होंने ‘थिंक-पेयर-शेयर’, ‘जिग्सॉ’ और ‘गैलरी वॉक’ जैसी तकनीकों का उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे कक्षा को अधिक सहभागितापूर्ण बनाया जा सकता है। विद्यालय के सभी आचार्यों ने रोल प्ले के माध्यम से विभिन्न प्रस्तुतियाँ देकर विषय को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य नारायण सिंह ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि एक्टिव लर्निंग आधुनिक शिक्षण का आधार है। यह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवाद-कौशल और समस्या-समाधान की क्षमता का विकास करती है। उन्होंने दोनों विषय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि कार्यशाला अत्यंत उपयोगी, शिक्षाप्रद एवं प्रेरणादायक रही। सभी आचार्यों ने संकल्प लिया कि वे अपनी कक्षाओं में एक्टिव लर्निंग तकनीकों का प्रयोग करके विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में सतत् प्रयत्नशील रहेंगे। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ।