एनडी हिन्दुस्तान
करनाल। उपायुक्त विश्राम कुमार ने बताया कि एग्री-स्टैक, कृषि तथा किसान कल्याण विभाग मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा विकसित एक प्रमुख कृषि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। यह कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रही है, जो कि देश के सभी किसानों का भूमि रिकॉर्ड, विशिष्ट पहचान संख्या फसल विवरण और सरकारी योजनाओं का एक एकीकृत डेटाबेस स्थापित करके खेती प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।उन्होंने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या बनाना है जो आधार से जुड़ी होगी। किसानों को उनकी भूमि रिकॉर्ड तक आसान पहुंच प्रदान करना जिससे ऋण और बीमा या आसान होगी। किसानो को सभी सरकार योजनाओ जैसे पी.एम. किसान, कृषि इनपुट (खाद, बीज इत्यादि) का लाभ इसी के माध्यम से प्रदान होगा। सभी सरकार योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों द्वारा एग्री-स्टैक के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान संख्या बनवाना आवश्यक है।उन्होंने बताया कि पी.एम. किसान योजना के तहत मिलने वाली आगामी किस्त उन्ही किसानों को मिलेगी जो अपनी विशिष्ट पहचान संख्या बनवा लेंगे। जिला में पी.एम. किसान योजना के अंतर्गत 98,647 किसान पंजीकृत है जिसमें से अभी तक 17000 किसानों ने अपनी विशिष्ट पहचान संख्या बनवा ली है। बाकी बचे किसान भी पी.एम. किसान योजना का लाभ लेने के लिए जल्द से जल्द अपनी किसान आईडी बनवा ले।उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत कृषि तथा किसान कल्याण विभाग तथा राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी प्रत्येक गांव में कैंप लगाकर किसानों की विशिष्ट पहचान संख्या बना रहे है। सभी किसान इन कैंपों में जाकर अपनी किसान आईडी बनवा सकता है। इसके अतिरिक्त किसान गांव में कॉमन सर्विस सेंटर/अटल सेवा केंद्र पर जाकर भी अपनी किसान आईडी बनवा सकता है।जिला करनाल के सभी किसानों से अनुरोध है की वो सभी सरकारी योजनाओं जैसे कि पी.एम. किसान इत्यादि का लाभ लेने के लिए जल्द से जल्द गांव में लगे कैंप में या कॉमन सर्विस सेंटर/अटल सेवा केंद्र पर जाकर अपनी विशिष्ट पहचान संख्या बनवा ले।