मृत्यु को कैसे संभाला जाए, यह सीखाती है भागवत कथा : विष्णुकांत शास्त्री
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी की प्रेरणा से कृष्ण कृपा गौशाला परिसर में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। आकाश नगर से कथावाचक विष्णुकांत शास्त्री के सानिध्य में 108 कलशधारी महिलाओं के साथ भागवत जी को शिरोधार्य करके शोभायात्रा आरंभ हुई। इस शोभा यात्रा में भक्तिरस से ओत-प्रोत भजन गाए गए। कथा स्थल श्री कृष्ण कृपा गौशाला में जाकर शोभायात्रा संपन्न हुई और सभी 108 कलश व्यास पीठ पर स्थापित किए गए।
गऊ सेवार्थ आयोजित इस भागवत कथा के प्रथम दिन व्यास पीठ से अमृत वर्षा करते हुए प्रसिद्ध कथावाचक विष्णुकांत शास्त्री ने कहा कि कलयुग में सबसे बडा भय काल का होता है। काल से भयभीत प्राणी दशों दिशाओं में विचरण करता है। इस काल से बचने का सबसे सरल उपाय भागवत जी की कथा है। उन्होने कहा कि रामायण जीवन का व्यवहार सीखाती है और महाभारत जीवन में क्या नही करना चाहिए यह बताती है और भागवत एक ऐसा ग्रंथ है जो यह सीखाती है कि कैसे मरना चाहिए, यही भागवत की विशेषता है। जीवन में हर पल, हर क्षण मृत्यु है। काल और समय का ही दूसरा नाम मृत्यु है। मृत्यु को कैसे संभाला जाए यह सीखाने का काम भागवत करती है।
विष्णुकांत शात्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने वेणुका वादन और नृत्य ब्रज में किया जबकि गायन कुरुक्षेत्र की पवित्र धरा पर गीता के रूप में किया। यह ऐसा गायन था कि भगवान ने गीता के रूप में सारे विश्व को अदभुत ज्ञान दिया। उन्होने कहा कि गौपालन और गौचारण दोनो होने चाहिए। गौचारण के बिना गाय को आनंद नही आता। कुरुक्षेत्र की भूमि वियोग के बाद संयोग की धरा है। कुरुक्षेत्र की पवित्र धरा पर लंबे वियोग के पश्चात राधा और माधव का संयोग हुआ था।
प्रथम दिन की भागवत कथा में मुख्य यजमान के रूप में कृष्ण कृपा गौशाला के प्रधान हंसराज सिंगला, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड़ के सदस्य महेंद्र सिंगला, ट्रस्टी मंगत राम जिंदल, गौशाला के सरंक्षक आरडी गोयल और पंकज गुप्ता ने भाग लिया व भागवत जी की आरती उतारी। इस अवसर पर विजय नरूला, सुनील वत्स, कृष्ण लाल पुंडरी वाले, श्याम आहुजा, रमाकांत शर्मा, पवन भारद्वाज, मंगत राम मैहता, मीडिया प्रभारी रामपाल शर्मा, मीनाक्षी नरूला, काव्य नरूला, सविता शर्मा, दीपक आहुजा सहित भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसवादन किया।