न्यूज डेक्स इंडिया
लखनऊ। यूपी में इंटर कालेज में पढ़ाने वाला एक शिक्षक डाक्टर बनकर कोविड मरीज का इलाज कर रहा था,वहीं दूसरा बड़ा खुलासा आज बलिया में हुआ,यहां फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर एक 12 साल से एक महिला शासकीय विद्यालय में पढ़ा रही थी। अब बात उस शिक्षक की जो पेशे तो बाराबंकी के सफरदरगंज के इंटर कालेज में सरकारी शिक्षक शिवेंद्र पटेल (45) है,मगर जनाब मास्टर से डाक्टर कब बन गए किसी को पता ही नहीं चला। पता भी तब चला जब यह जनाब एक महिला के कोरोना संक्रमित पति का इलाज करते हुए सात दिन में दो लाख डकार चुके थे।
ये मास्टर जी, डाक्टर जी बनकर बकायदा मरीजों का इलाज कर रहे थे। खुलासा हुआ तो पता चला कि मास्टर जी ने नव्या क्योर मेडिक्स नाम से एक चिकित्सा केंद्र बनाया हुआ था। इस चिकित्सा केंद्र में उपचार के लिए आया एक मरीज जान भी गंवा चुका है,इसकी जानकारी भी मिली तो इस मरीज की पत्नी ने बताया कि उसका पति सात दिन से इलाज करा रहा था। जब उसकी तबीयत खराब हुई तो दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया,जहां उसकी मौत हो गई। इस महिला ने जब इस डाक्टर की पुलिस को शिकायत की तो पूरा खुलासा हुआ। शिवेंद्र पटेल उन्नाव के सफीपुर का रहने वाला है।
उत्तर प्रदेश के ही बलिया में दूसरा बड़ा खुलासा 12 साल से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी स्कूल में शिक्षिका बनी महिला को एसटीएफ ने पकड़ा है। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि शिक्षिका ममता कुमारी ममता कुमारी बीटीसी 2007 में चयनित हुई थी और 27 जून 2009 को सेवा में आई थी।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवनारायण सिंह ने आज यह जानकारी देते हुए बताया है कि प्राथमिक विद्यालय, छोटकी विषहर में तैनात शिक्षिका ममता कुमारी को बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर एसटीएफ ने प्रमाण पत्रों की जांच की तथा जांच में इंटरमीडिएट की मार्कशीट फर्जी पाई गई थी।