न्यूज डेक्स संवाददाता
पंचकूला। पंचकूला में किसानों के रोष प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन की प्रति लेने के लिए गवर्नर के प्रतिनिधि के तौर पर उनके एडीसी पहुंचे और इन्होंने खुद मौके पर आकर लिया ज्ञापन लिया। दिल्ली की सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर शुरु हुए किसान आंदोलन को आज पूरे सात महीने हो गए हैं।
इस दिन को संयुक्त किसान मोरचा ने अघोषित एमरजेंसी दिवस के साथ तीन कृषि कानूनों के विरोध में खेती बचाओ,लोकतंत्र बचाओ दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की थी और किसानों अपील की थी कि वे देशभर में इन तीन कृषि कानूनों के विरोध में रोष पत्र अपने अपने राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रांत में उपराज्यपालों को सौंपे।
यहां हरियाणा में भारी संख्या में किसान नाडा साहिब गुरुद्वारा पहुंचने की अपील पर शनिवार को काफी संख्या में किसान यहां पहुंचे थे। पंचकूला में इकट्ठा हुए हजारों की संख्या में किसान ने गुरुद्वारा नाडा साहिब से चंडीगढ़ राज भवन तक पैदल मार्च किया।
भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढुनी ने पंचकूला बार्डर पर ज्ञापन सौंपने के बाद बिजली दफ्तर के घेराव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को सरकार वापस ले। अगर तीनों किसी कानूनों को वापस नहीं लेती है तो 2024 के चुनाव तक आंदोलन जारी रहेगा। आज आंदोलन के दौरान पंचकूला में भारी भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुई।
पंचकूला में किसानों और पुलिस के बीच टकराव की स्थित भी उत्पन्न हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका दिया। किसान प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते चले।हालांकि पंचकूला पुलिस द्वारा कड़े बंदोबस्त किए गए थे। पंचकूला पुलिस ने घग्गर नदी के पुल के पास हैवी बेरीगेटिंग कर किसानों को रोकने का प्रयास तो किया,लेकिन नाकाम रहे।
भाकियू नेता राकेश टिकैत गिरफ्तार हो गए यह खबर चलते ही पुलिस हरकत में आ गई।इसके तुरंत बाद डीसीपी ईस्ट दिल्ली ने ट्वीट कर यह स्पष्ट किया कि टिकैत की गिरफ्तारी का समाचार फर्जी है! उन्होंने साफ किया कि राकेश टिकैत की गिरफ्तारी से संबंधित खबर झूठी है और कृपा करके ऐसी फर्जी खबरों को ट्वीट करने से दूर रहें। वरना इस तरह की झूठी खबरें/ट्वीट फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, जगजीत सिंह दल्लेवाल, योगेंद्र यादव, युद्धवीर सिंह के अलावा कई किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों पर रवैए की तीखे शब्दों में आलोचन की।