चार माह भी पूरे नहीं कर पाए त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर सीएम बनाए गए तीर्थ सिंह रावत
चार साल सीएम रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद 10 मार्च 2021 को ली थी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ
न्यूज डेक्स इंडिया
दिल्ली।मानसून की फुहारें अभी गायब है,मौसम का मिजाज उत्तराखंड,यूपी,पंजाब,राजस्थान और हरियाणा की सियासत की तरह गरमा रहा। वादियों और ठंडक लिए मशहूर देवभूमि उत्तराखंड की सियासी गर्मी तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद बढ़ चुकी है। इस्तीफा क्यों ? यह चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोर शोर से है। होना भी लाजिमी है। कहां तो उनके दो उत्तराखंड की दो सीटों में से किसी एक पर उपचुनाव लड़ने की अटकलें चल रही थी और मार्च में त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के ठीक चार माह बाद तीरथ भी उसी राह पर क्यों चले गए,इसके पीछे के कारण क्या रहे ? ये खबरें छन छन कर अगले दिनों में सामने आएंगी।
उत्तराखंड के इस नए एपीसोड से पहले ही पंजाब,यूपी,राजस्थान और हरियाणा में सियासी गरमी परवान पर है। पंजाब में सिद्धू-कैप्टन विवाद और यहां सत्तारुढ दल कांग्रेस की धड़ेबंदी की गरमी दिल्ली आलाकमान को भी झुलसाने में लगी है। इधर हरियाणा में विपक्ष के नेता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा का विवाद पिछले तीन दिनों से और ज्यादा सुर्खियों में है। हुड्डा खेमे के विधायक और कई वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा को हटाकर कमान हुड्डा को देने का दबाव बना रहे हैं। इधर आज पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला सीबीआई कोर्ट से मिली 10 साल की सजा के बाद तिहाड़ से बाहर आ चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद हरियाणा में सियासी पारा चढ़ना लाजिमी है। वैसे तो गरमी के लिए जाना पहचाना नाम है राजस्थान का,जहां महीनों से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट विवाद ठंडे गरम के साथ चल रही रहा। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की पैंचेबाजी पिछले महीनें में नेशनल मीडिया में खूब छाई रही,यहां अब थोड़ा वातावरण बदला है। मगर तीरथ सिंह रावत का इस्तीफा इन सब विवादों को पीछे छोड़ चुका है।
10 मार्च 2021 को उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले रावत अब पार्टी आलाकमान से मुलाकात के बाद इस्तीफा दे चुके है।इसके पीछे बड़ा कारण कई नेताओं की नाराजगी को बताया जा रहा है। इसी कारण से उन्हें दिल्ली दरबाल में तलब किया था। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद उन्होंने देहरादून लौटने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। अब इस सियासी संकट को टालने के लिए भाजपा को नए सिरे से विधायक दल के नेता का चुनाव करना होगा। इसके लिए पार्टी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और विधायक दल की बैठक जैसी मैराथन चलेगी।
पिछले दिनों कांग्रेस के दिग्गज नेता भी संवैधानिक कारणों का हवाला देकर बयानबाजी कर रहे थे,मगर उस समय भाजपा के दिग्गज नेता तारीखों और पदभार संभावने की तारीख का हवाला देकर सब कुछ सामान्य होने की बात करने लगे थे। मगर अब खुद रावत ने संवैधानिनक कारणों का हवाला देकर अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपा है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिख कर इस्तीफ़ा भेजा, इसमें लिखा जनप्रतिनिधि क़ानून की धारा 151 A के तहत अब उपचुनाव संभव नहीं है, इसलिए मै मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे रहा हूं।
सूचनानुसार तीरथ सिंह ने रात 10 बजे राज्यपाल से भी मिलने का समय ले चुके हैं। वहीं शनिवार दुपहर 3 बजे उत्तराखंड मे भाजपा विधायक दल की बैठक बुला ली गई है।इस बैठक से पहले नए सीएम के तौर पर धन सिंह और सतपाल महाराज समेत चार नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पद की रेस में रीतू खंडूरी और पुष्कर धामी का नाम भी प्रमुखता से आ रहा है। हालांकि होगा वही जो मंजूर ए दिल्ली दरबार होगा।