न्यूज डेक्स इंडिया
दिल्ली। संसद के पास किसानों ने खुले आसमान के नीचे किसानों की संसद चली। सिंघु बार्डर से यह किसान संसद तक पहुंचने के लिए सुबह रवाना हुए थे,लेकिन ढाई घंटे की मशक्कत के बाद संसद के निकट पहुंचने में सफल हुए। इस बीच कई जगहों पर दिल्ली पुलिस और किसानों की तनातनी की स्थिति भी पैदा हुई। एक बजे यह किसान यहां आकर मोर्चे पर डट गए और शांतिपूर्वक तीन कृषि कानूनों का विरोध करते दिखे। यहां किसान संसद के तीन सत्र भी हुई,जिसमें करीब 50 से ज्यादा किसान चर्चा में शामिल हुए।
शाम को किसान संसद राष्ट्रगान का पहला दिन बगैर किसी बड़े विवाद के संपन्न हुआ और इसके बाद सभी किसान वापिस पुलिस सुरक्षा में सिंघु बार्डर पर पहुंचे,लेकिन इस बीच किसानों में केंद्रीय राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी के बयान से आक्रोश भी दिखा। लेखी के बयान की चौतरफा निंदा हो रही है। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि यह किसान नहीं है,बल्कि मवाली हैं। इस राकेश टिकैत ने मीनाक्षी लेखी पर अपनी व्यंग्यात्मक शैली में कहा कि दिल्ली के चमचमाते बंगलों में रहने वालों संघर्षशील किसान मवाली ही दिखेगा।
वहीं किसानों के प्रदर्शन के दौरान योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान जंतर-मंतर पर सरकार को यह दिखाने के लिए आए हैं कि वह मूर्ख नहीं हैं, ब्रिटेन की संसद में भी हमारे मुद्दों पर बहस चल रही है, मगर दुभाग्यपूर्ण है कि हमारी सरकार नहीं। आज किसानों इस प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर सरकार से तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग करते हुए नारेबाजी भी गई। प्रदर्शन कर रहे किसान जंतर-मंतर के एक छोटे से हिस्से में मौजूद रहे और पुलिस ने दोनों ओर बैरिकेड्स लगाए हुए थे,प्रदर्शनकारियों की संख्या से कई गुणा पुलिस के जवान यहां मुस्तैद रहे। संसद की कार्रवाई के दौरान अगले दिनों में भी यहां इस तरह के दृश्य सामने आने वाले हैं।