गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित छठी उत्सव का आनंद उठाया श्रद्धालुओं ने
भाग्य निर्धारण का दिन है छठी उत्सव : स्वामी ज्ञानांनद
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। लगे कुटिया भी दुल्हन सी, मेरे सरकार आए हैं। बिछा दो अपनी पलकों को मेरे दातार आए हैं। नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की तथा सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं… इत्यादि राधा और कान्हा भाव के भजनों पर गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित छठी उत्सव पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने खूब आनंद उठाया। सोनीपत निवासी भजन गायक राजीव शास्त्री ने जब हुई रोशन मेरी गलियां, के पातनहार आए हैं, गाया तो श्रद्धालु थिरके बिना नही रह सके। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी के सानध्यि में आयोजित कान्हा छठी उत्सव का श्रद्धालुओं ने खूब आनंद उठाया। इस भजन संध्या का शुभारंभ राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान के निदेशक डा. सतीश कुमार, नगर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. हिमांशु आनंद, दीनबंधू छोटूराम यूनिवर्सिटी मुरथल के रजिस्ट्रार डॉ. सुरेश, भिवानी से आए मनोज तंवर, डा. सदाहंस तथा अतुल गोयल ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारा आयोजित किया गया।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज जी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि छठी उत्सव हम सबके भाग्य निर्धारण का दिन है। इसी दिन कान्हा ने पूतना को मोक्ष दिया था। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण उनके प्रति प्रेम का भाव करने वाले को उच्च स्थान देते हैं। कृष्ण ने अर्जुन का सारथी बनकर उसे उच्च स्थान दिया। इसी प्रकार सुदामा ने उनके प्रति प्रेम दिखाया तो उसे अपने सिंहासन पर बिठाया। दुर्योधन का राजशाही भोजन त्यागकर महात्मा विदुर के घर बिना नमक का साग खाया। गीता मनीषी ने कहा कि सनातन धर्म व संस्कृति भारत का गौरव है। दुनिया में केवल भारत एक ऐसी धरा है जहां भगवान स्वयं प्रकट होते हैं जबकि अन्य देशों में भगवान के मैसेंजर पैदा होने का दावा किया जाता है। छठी उत्सव का महत्व बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि कृष्ण अवतार एक अद्भुत अवतार है। यह नाचने-नचाने और हर स्थिति में मुस्कुराने की प्रेरणा देता है। इस अवतार में भगवान स्वयं भी नाचे और दुनिया को भी नचाया। प्रेम कृष्ण अवतार की भव्य-दिव्यता है। कन्हैया की लीलाओं पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि कन्हैया की हर लीला में गीता का भाव है। राधा को साक्षात प्रेम बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां प्रेम प्रकट होता है वहां भगवान उसे ऊंचा आसन देते हैं। छठी उत्सव को कान्हा का नामकरण किया गया था। गीता ज्ञान संस्थान में भगवान श्री कृष्ण की हर लीला पर शोध किया जाएगा। दुनिया भर में जहां भी गीता से संबंधित सामग्री उपलब्ध है उसे गीता ज्ञान संस्थान में एकत्रित किया जाएगा ताकि गीता पर शोध करने वालों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने जीवन में गीता का अनुसरण करें।